देश की खबरें | जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव के खिलाफ आरोप की निष्पक्षता से जांच कराये जाने की जरूरत: उमर

श्रीनगर, 29 अगस्त नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव ए.के. मेहता के खिलाफ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक दलित अधिकारी के आरोप इतने गंभीर हैं कि उनकी जांच होनी चाहिए।

आईएएस अधिकारी ने मेहता पर परेशान करने और अनियमितता के आरोप लगाये हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस तरह की जांच कभी नहीं होगी और मीडिया ने भी प्रकरण को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

उमर ने ‘एक्स’ (पूर्व मे ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आरोप इतने गंभीर हैं कि निष्पक्ष जांच कराये जाने की जरूरत है, लेकिन हम जानते हैं कि यह कभी नहीं होगा। अफसोस है कि समाचार मीडिया ने इस प्रकरण की पूरी तरह से अनदेखी की है। वे मिस वर्ल्ड और अन्य मनोरंजक कार्यक्रमों की कवरेज करने में लगे हुए हैं। विज्ञापनों से मिलने वाले पैसों का लोभ और पुलिस थानों की ओर से तलब किये जाने के डर ने प्रभावी रूप से उसे खामोश कर दिया है, जो कभी जम्मू कश्मीर में एक जीवंत स्वतंत्र प्रेस हुआ करता था।’’

नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष एक राष्ट्रीय अखबार में आई एक रिपोर्ट का हवाल दे रहे थे, जिसमें कहा गया है कि आईएएस अधिकारी अशोक परमार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के समक्ष एक शिकायत दायर की है।

परमार 1992 बैच के एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी हैं। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया है कि अनुसूचित जाति का होने और जम्मू कश्मीर में जल शक्ति विभाग के जल जीवन मिशन में गड़बड़ियों को उजागर करने के चलते उनका बार-बार तबादला किया गया है।

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