उच्च आर्थिक गतिविधियों वाले जिलों को सभी औद्योगिक, कारोबारी परिचालन की अनुमति दी जाए : सीआईआई
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नयी दिल्ली, तीन मई भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सुझाव दिया है कि लॉकडाउन के दौरान उल्लेखनीय आर्थिक गतिविधियों वाले जिलों को सभी औद्योगिक और कारोबारी परिचालन शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, इसके साथ ही उपक्रमों के लिए उच्च सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उद्योग मंडल ने कहा कि ऐसा करने से ही कंपनियां वित्तीय रूप से टिकने योग्य रह सकती हैं। इसके साथ ही हम नौकरियां भी बचा सकेंगे।

सीआईआई ने सरकार को ‘आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए रणनीतिक नोट’ पर एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें यह सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च आर्थिक गतिविधियों वाले जिलों को उच्चस्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ सभी औद्योगिक और कारोबारी परिचालन शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इनमें नियंत्रण वाले क्षेत्र भी शामिल हैं।

सरकार की ओर से एक मई को जारी अधिसूचना में शहरी क्षेत्रों के ‘रेड जोन’ में सीमित लोगों को प्रवेश की अनुमति के साथ औद्योगिक एस्टेट्स, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) और औद्योगिक टाउनशिप में परिचालन शुरू करने की अनुमति दी गई है।

सीआईआई ने सुझाव दिया है कि गैर-अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र और एकल इकाइयों सहित शहरी क्षेत्रों की सभी इकाइयों को परिचालन की अनुमति दी जानी चाहिए। इनमें गैर-आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की इकाइयां भी शामिल हैं।

सीआईआई ने कहा कि आसपास के क्षेत्र को ऑरेंज क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है और वहां सख्त ऐहतियाती उपायों और निगरानी के साथ औद्योगिक गतिविधियों को जारी रख्नने की अनुमति दी जा सकती है।

सीआईआई ने कहा कि आवश्यक और गैर-आवश्यक के अंतर को समाप्त किया जाना चाहिए और सभी कारखानों को काम शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘तीसरे चरण के लॉकडाउन में यह जरूरी हो जाता है कि कोविड-19 की वजह आर्थिक गिरावट को कम से कम किया जाए। हालांकि, इसके साथ ही महामारी पर अंकुश के प्रयासों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि उच्च आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों वाले जिलों को प्राथमिकता देते हुए वहां सभी आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, सुरक्षा के सभी उपाय सख्ती से लागू होने चाहिए। परिचालन की अनुमति से उपक्रम टिकने की स्थिति में आ सकेंगे और साथ ही हम नौकरियां भी बचा सकेंगे।

सीआईआई ने सुझाव दिया है कि शीर्ष जिलों की पहचान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उनके योगदान, औद्योगिक एस्टेट्स की मौजूदगी या उपक्रमों के पंजीकरण से की जा सकती है।

सीआईआई ने कहा कि पूरे जिले को रेड क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत करने के बजाय इन्हें औद्योगिक जिले के भीतर नियंत्रित, ऑरेंज और ग्रीन क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।

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