देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून में संशोधनों को लेकर एजेकेपीसी के सदस्यों के सुर अलग-अलग
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

जम्मू, 20 अक्टूबर पंचायती राज कानून में हाल में हुए संशोधनों को लेकर मंगलवार को अखिल जम्मू-कश्मीर पंचायत सम्मेलन (एजेकेपीसी) में मतभेद सामने आए। इसके अध्यक्ष और चेयरमैन ने संशोधनों को लेकर अलग-अलग बयान दिए हैं। एजेकेपीसी निर्वाचित पंचायत सदस्यों का प्रमुख निकाय है।

एजेकेपीसी के अध्यक्ष अनिल शर्मा के धड़े ने जहां संशोधन का स्वागत किया और कहा कि केंद्रशासित प्रदेश के लोग ‘‘स्थानीय निकायों के वास्तविक सशक्तीकरण’’ के लिए 70 वर्षों से अधिक समय से इंतजार कर रहे थे वहीं इसके चेयरमैन शफीक मीर ने संशोधन को केंद्रशासित क्षेत्र में नवगठित पंचायती राज व्यवस्था को ‘‘शक्तिहीन’’ करने का प्रयास करार दिया।

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जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून में संशोधन किया था ताकि हर जिले में जिला विकास परिषद् (डीडीसी) का गठन किया जा सके जिसमें सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे।

एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि संबंधित उपायुक्तों द्वारा परिसीमन के बाद हर जिले की डीडीसी में 14 क्षेत्र होंगे। यह कदम केंद्रशासित प्रदेश में संपूर्ण 73वें संशोधन को लागू करने की दिशा में उठाया गया है।

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अरूण कुमार शर्मा, सुरिंदर कुमार भगत, सरशद नटनू, बृजेश्वर सिंह और आफताब अहमद बेग सहित कई प्रखंड विकास परिषद् (बीडीसी) अध्यक्षों के साथ एजेकेपीसी के चेयरमैन मीर ने संशोधनों को वापस लेने की मांग की और कहा, ‘‘इस तरह के आदेश से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को इस तरह के संस्थानों में प्रवेश करने का दरवाजा खोल दिया गया है जो स्पष्ट रूप से अन्याय है और इससे पंचायत के नेता निराश होंगे।’’

पुंछ जिले के बुफलियाज से बीडीसी के अध्यक्ष मीर ने कहा, ‘‘केवल इतना ही नहीं इस संशोधन से बीडीसी के निर्वाचित अध्यक्षों को जिला अध्यक्ष का चुनाव लड़ने या वोट देने का अधिकार नहीं होगा जो पंचायती राज कानून की भावनाओं के विपरीत है।’’

दूसरी तरफ एजेकेपीसी के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून में हालिया संशोधनों का स्वागत किया और कहा कि केंद्रशासित प्रदेश के लोग ‘‘स्थानीय निकायों के वास्तविक सशक्तीकरण’’ के लिए 70 वर्षों से अधिक समय से इंतजार कर रहे थे।

बहरहाल उन्होंने पंचों और सरपंचों से ‘‘भारत और लोकतंत्र के प्रति शत्रुता रखने वाली नकारात्मक ताकतों से सतर्क रहने की अपील की जो किसी न किसी बहाने लोगों को गुमराह कर सकती हैं।’’

शर्मा ने जम्मू-कश्मीर में पंचायती राज संस्थानों को मजबूत करने की खातिर इस तरह का ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।

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