मुंबई, 25 जुलाई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता एकनाथ खडसे के दामाद गिरीश चौधरी 2016 के जमीन सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में अपनी गिरफ्तारी के दो साल से अधिक समय बाद मंगलवार को जेल से बाहर आये। उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली है।
चौधरी के वकील मोहन टेकावड़े ने बताया कि एक लाख रुपये की जमानत राशि का भुगतान करने समेत सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके मुवक्किल को मध्य मुंबई की आर्थर रोड जेल से छोड़ा गया।
उच्चतम न्यायालय ने 21 जुलाई को उन्हें जमानत दी थी, लेकिन यहां विशेष पीएमएलए अदालत में जमानत औपचारिकताएं मंगलवार को ही पूरी हो पायीं, उसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया।
शीर्ष अदालत के निर्देश पर विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश ने चौधरी की रिहाई के लिए कुछ शर्तें लगायीं, जिनमें उन्हें धनशोधन मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय को अपना पासपोर्ट सौंपना है।
जमानत की शर्तों के अनुसार चौधरी को हर महीने के पहले शुक्रवार को ईडी कार्यालय में पेश होने तथा विशेष अदालत (मुंबई) की अनुमति के बगैर उसके क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जाने को कहा गया है। विशेष अदालत ने कहा कि सुनवाई के शीघ्र निस्तारण के लिए चौधरी को अदालत की हर सुनवाई में आना होगा तथा जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना होगा।
चौधरी को सात जुलाई, 2021 को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत ईडी ने गिरफ्तार किया था। उससे पहले विशेष अदालत और उच्च न्यायालय दोनों ने ही उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।
ईडी का मामला पुणे के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री खडसे, उनकी पत्नी मंदाकिनी और चौधरी के खिलाफ अप्रैल, 2017 में दर्ज की गयी प्राथमिकी पर आधारित है।
ईडी का दावा है कि जमीन सौदे में अनियमितता से सरकारी खजाने को 61.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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