डब्ल्यूएफपी की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैककेन ने कहा, ‘‘खाद्य सहायता को दूसरी जगह भेजा जाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है, और हम इसकी जांच करने तथा इसकी जवाबदेही तय करने के लिए इथियोपिया की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं।’’
डब्ल्यूएफपी का मुख्यालय रोम में है। इस विषय पर और अधिक टिप्पणी के लिए संपर्क किये जाने पर इसने इनकार कर दिया।
करीब करोड़ इथियोपियाई नागरिक देश में सूखे की समस्या और संघर्ष के कारण खाद्य सहायता पर निर्भर हैं। इनमें से ज्यादातर मदद ‘यूएसएड’ (यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट) उपलब्ध कराता है। इथियोपिया की आबादी करीब 12 करोड़ है।
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के इस कदम से अफ्रीका की दूसरी सर्वाधिक आबादी वाले देश में कुपोषण बढ़ने की आशंका जताई जा रही।
यूएसएड, डब्ल्यूएफपी और इथियोपियाई सरकार ने यह नहीं कहा है कि खाद्य सहायता दूसरी जगह भेजे जाने के लिए जिम्मेदार कौन है, जिसे अमेरिका ने ‘व्यापक और समन्वित’ करार दिया है।
हालांकि, विदेशी दानकर्ता प्रतिनिधियों के एक समूह ने एक आंतरिक मेमो तैयार किया है जिससे इसमें सरकार की मिलीभगत होने का संकेत मिलता है।
यूएसएड के साथ एक संयुक्त बयान में इथियोपियाई विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को अत्यधिक चिंता पैदा करने वाले खुलासे किये और कहा कि वह अमेरिका के साथ जांच कर रहा है ताकि इसकी जवाबदेही तय की जा सके।
राष्ट्रव्यापी खाद्य सहायता रोके जाने का कदम यूएसएड और डब्ल्यूएफपी द्वारा पिछले महीने जारी इस बयान के बाद आया है कि उन्होंने इथियोपिया के उत्तरी तिगरे क्षेत्र में खाद्य आपूर्ति रोक दी है। उन्होंने वहां खाद्य सहायता चोरी होने की घटनाओं के मद्देनजर यह निर्णय लिया था।
उल्लेखनीय है कि यूएसएड ने एक दिन पहले कहा था कि उसने आबादी के लिहाज से अफ्रीका के दूसरे सबसे बड़े देश इथियोपिया को भेजी जाने वाली सभी खाद्य सहायता रोक दी है।
एजेंसी ने बताया कि आंतरिक जांच में यह बात सामने आई है कि लाखों लोगों की भूख मिटाने के लिए आपूर्ति की गई खाद्य सहायता दूसरी जगह भेजी जा रही है।
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