देश की खबरें | केरल में लोगों और आवारा कुत्तों के बीच संघर्ष के कारण प्रभावित

तिरूवनंतपुरम, 16 सितंबर केरल में आवारा कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है और लोगों में इनके प्रति इतना गुस्सा है कि हाल ही में प्रदेश के कोट्टायम जिले में बच्चों सहित तमाम लोगों को काटने वाले एक कुत्ते को स्थानीय लोगों ने पीट-पीट कर मार दिया और जमकर हंगामा किया।

देश के इस दक्षिणी राज्य में यह केवल अकेली घटना नहीं है, प्रदेश में कुछ स्थानों पर दर्जनों ऐसे आवारा कुत्ते मृत मिले हैं जिन्हें कथित रूप से जहर देकर मारा गया है ।

प्रथम दृष्टया, ये हरकतें अमानवीय लगती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि प्रदेश में कुत्तों पर हमलों में वृद्धि देखी जा रही है और मौजूदा हालात में जनता को मामले को अपने हाथ में लेने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

कुत्तों के समूह को मारने का विरोध करने वाली कोझिकोड़ की महापौर वीणा फिलीप को भी राज्य में मौजूदा स्थिति को देखते हुये मामले में अपना रूख बदलना पड़ा है । उन्होंने कहा कि लोग जो कर रहे हैं, उसके लिये उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है ।

वीणा ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘‘इस तरीके से अगर हमारे अपने बच्चों पर कुत्ते हमला करते हैं और लोग इस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं तो उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है । मैं कुत्तों को मारने के पक्ष में नहीं हूं और न ही मैं इसे सही करार दूंगी । लेकिन, इस मौजूदा स्थिति में मैं लोगों को दोषी नहीं ठहरा सकती ।’’

उन्होंने कहा कि अगर कुत्ते के काटने के इतने मामले नहीं होते, तो शायद अधिक मानवीय दृष्टिकोण पर विचार किया जा सकता था।

हालांकि, पिछले साल, जब कुत्तों के काटने की इतनी खबरें नहीं थीं, तब तिरुवनंतपुरम के आदिमलाथुरा समुद्र तट पर एक कुत्ते को बेरहमी से पीट-पीट कर मार दिया गया था और एर्णाकुलम के थ्रीक्काकारा नगर पालिका में सैकड़ों कुत्तों को जहर देकर मारा गया था ।

केरल उच्च न्यायालय ने उस वक्त मामले में हस्तक्षेप करते हुये पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) के उपायों के उचित कार्यान्वयन तथा कुत्तों के टीकाकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी किया था ।

इसके बावजूद, अदालत को राज्य को नागरिकों की रक्षा करने के अपने दायित्व की याद दिलाने और आम जनता को कानून अपने हाथ में लेने के प्रति सावधान करने के लिए भी इस बार हस्तक्षेप करना पड़ा।

कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने में सरकार की अक्षमता या रैबीज निरोधक टीकों की प्रभावशीलता के बारे में विश्वास पैदा करने में सरकार की बढ़ती आलोचना के बीच, राज्य सरकार और उसके विभिन्न अधिकारियों ने युद्ध स्तर पर इस खतरे से निपटने के लिए कदम उठाए हैं।

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