ताजा खबरें | देशद्रोह के मामलों को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप

नयी दिल्ली, 16 मार्च लोकसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान देशद्रोह के मामलों के मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति देखने को मिली जहां विपक्षी पार्टी ने सरकार पर देशद्रोह से जुड़े कानूनों का दुरूपयोग करने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) का पत्रकारों, मजदूर संगठनों के नेताओं, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल करने वाली कांग्रेस को इस मुद्दे पर ‘उपदेश’ देने का कोई अधिकार नहीं है।

प्रश्नकाल के दौरान तेलंगाना से कांग्रेस सदस्य अनुमुला रेवंथ रेड्डी ने सरकार से जानना चाहा कि पिछले 10 वर्ष में देशभर में देशद्रोह के अपराध से जुड़े कितने मामले दर्ज किये गए हैं और इनकी तेजी से सुनवाई के लिये क्या कदम उठाये गए हैं। उनका पूरक प्रश्न जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी पर केंद्रित रहा जिन्हें किसानों के प्रदर्शन संबंधी टूलकिट मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

इस पर जी किशन रेड्डी ने कहा कि 2014 में देशद्रोह के 47 मामले, 2015 में 30 मामले, 2016 में 35 मामले, 2017 में 51 मामले, 2018 में 70 मामले और 2019 में 93 मामले दर्ज किये गए।

गृह राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘देशद्रोह के मामलों में केंद्र परोक्ष रूप से जुड़ा नहीं होता है।’’

हालांकि कांग्रेस सदस्य अनुमुला रेड्डी मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी एवं कुछ अन्य नेताओं ने भी ऐसे ही सवाल उठाये।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि उन्होंने 10 वर्षों का आंकड़ा मांगा था लेकिन सरकार 2014 से 19 तक की जानकारी दे रही है और आधी-अधूरी जानकारी देना गलत दिशा में ले जाने के समान है।

अनुमुला ने कहा कि 2019 में दोषसिद्धी की दर (देशद्रोह के मामलों में) 3.3 प्रतिशत थी, इसका अर्थ है कि ये राजनीति रूप से प्रेरित मामले थे। अगर किसी युवा पर देशद्रोह का मुकदमा चलता है और यह 4-5 वर्ष तक चलता है तब उसे नौकरी, पासपोर्ट, वीजा नहीं मिलता है। ऐसे ही आरोप दिशा रवि पर हैं लेकिन अदालत में साबित नहीं हो पा रहे हैं।

उन्होंने यह भी पूछा कि ‘‘क्या किसान नेताओं के खिलाफ लगाये गए गलत आरोपों के वापस लेने का कोई प्रस्ताव है?’’

इस पर गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, ‘‘ सदस्य पूछ रहे हैं कि 2014 से पहले देशद्रोह के मामलों का कोई आंकड़ा क्यों नहीं दिया गया। यह आंकड़ा इसलिये नहीं दिया जा सका क्योंकि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब इन मामलों का पृथक आंकड़ा नहीं रखा जाता था और इन्हें भारतीय दंड संहिता के मामलों के साथ जोड़ दिया जाता था।’’

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आने के बाद इनका पृथक आंकड़ा रखा जाने लगा।

रेड्डी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) का पत्रकारों, मजदूर संगठनों के नेताओं, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस्तेमाल करने वाली कांग्रेस को इस मुद्दे पर ‘उपदेश’ देने का कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि मीसा के तहत जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं को गिरफ्तार किया गया।

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