नयी दिल्ली, 10 अगस्त राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के अनिवासी भारतीय प्रकोष्ठ (एनआरआई सेल) को 2019 से 2022 के बीच मिली शिकायतों में से करीब 75 प्रतिशत का समाधान किया जाना बाकी है। एक संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही।
महिला सशक्तिकरण पर संसदीय समिति की ‘एनसीडब्ल्यू और राज्य महिला आयोगों के कामकाज’ पर रिपोर्ट बृहस्पतिवार को लोकसभा में पेश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, एनसीडब्ल्यू के एनआरआई सेल को 2019 से 2022 तक महिलाओं से कुल 2,056 शिकायतें मिलीं और उनमें से 1,554 शिकायतों का समाधान किया जाना लंबित है।
संसदीय समिति ने सिफारिश की कि एनसीडब्ल्यू को स्थानीय पुलिस, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से मामलों को तेजी से हल करने और एनआरआई पतियों द्वारा उत्पीड़ित, धोखाधड़ी की शिकार और परित्यक्त महिलाओं को राहत प्रदान करने के तरीके और साधन खोजने चाहिए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस तरह के उत्पीड़न व धोखाधड़ी के मामलों पर एक आंकड़ा तैयार किया जाए और जनता की जागरूकता के लिए प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया जाए।
एनआरआई मामलों से निपटने में आने वाली विभिन्न कठिनाइयों के बारे में विस्तार से बताते हुए एनसीडब्ल्यू ने समिति को बताया कि भारत सरकार ने 43 देशों के साथ आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (एमएलएटी) या समझौते किए हैं।
आयोग ने भारतीय समुदाय कल्याण कोष (आईसीडब्ल्यूएफ) के तहत मौजूदा दिशानिर्देशों के सीमित दायरे के कारण आने वाली विभिन्न चुनौतियों का सारांश दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक एनसीडब्ल्यू ने कहा कि दी गई कानूनी व वित्तीय सहायता अपर्याप्त है क्योंकि मामलों में लंबी समय सीमा होती है और इसलिए प्रारंभिक प्रक्रिया में 4,000 डॉलर की अधिकतम सीमा तक पहुंच जाती है। इससे शिकायतकर्ताओं को मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने में दिक्कतें आती हैं, जहां न तो वह मामले को वापस लेने में सक्षम होती है, न ही मामले को राजी करने में सक्षम होती है, लेकिन भारी भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित भारतीय महिलाओं को विदेश में रहने में सक्षम होने के लिए वित्तीय सहायता, वीजा मुद्दे, आवास जैसे मुद्दे को मौजूदा दिशानिर्देशों में शामिल नहीं किया गया है।
जब समिति ने पूछा कि क्या एनसीडब्ल्यू ने आईसीडब्ल्यूएफ के तहत कानूनी या वित्तीय सहायता के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों के सीमित दायरे का मुद्दा उठाया है, तो महिला निकाय ने कहा कि उसने समय-समय पर एकीकृत नोडल एजेंसी और अन्य अंतर-मंत्रालयी बैठकों के समक्ष अपने एजेंडे में इस मुद्दे को उठाया है।
समिति को यह भी सूचित किया गया कि एनसीडब्ल्यू ने लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों की रिपोर्ट करने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर शुरू किया था।
संसदीय समिति ने सिफारिश की कि एनसीडब्ल्यू मौजूदा हेल्पलाइन नंबर पर फिर से विचार करे और उन्हें अधिक सरल और याद रखने में आसान बनाने के लिए गंभीरता से विचार करे ताकि उपयोगकर्ता इसका पूरा उपयोग कर सकें।
समिति ने यह भी सुझाव दिया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और एनसीडब्ल्यू दोनों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास दर्ज शिकायतों के समाधान के लिए अपनाई जा रही प्रक्रियाओं पर गौर करना चाहिए और एक निश्चित अवधि के भीतर शिकायतों को हल करने के लिए उचित उपाय करने चाहिए।
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