नयी दिल्ली, 15 सितंबर भारत, चीन, मलेशिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों की एक टीम ने मृत मकड़ियों को औजारों के रूप में इस्तेमाल करने संबंधी अपने हास्यास्पद अध्ययन के लिए यांत्रिक अभियांत्रिकी (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) श्रेणी में इस साल का आईजी नोबेल पुरस्कार जीता है।
आईजी नोबेल पुरस्कार हास्यपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है।
तैतीसवें आईजी नोबेल पुरस्कार समारोह में जिन 10 उपलब्धियों के लिए विजेताओं को सम्मानित किया गया, उनके बारे में सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। इनमें मृतकों के नाक के बाल गिनने, मरी हुई मकड़ी का पुन: उपयोग करने, शौचालयों के बारे में अनोखी सोच जैसे विषय रहे।
पत्रिका ‘एनल्स ऑफ इंप्रोबेबल रिसर्च’ द्वारा निर्मित ऑनलाइन कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को पुरस्कार की घोषणा की गयी।
नोबेल पुरस्कार विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो मानवता को लाभ पहुंचाने वाले अनुसंधानों के लिए दिया जाता है।
हालांकि, आईजी नोबेल पुरस्कार बहुत ही हास्यास्पद उपलब्धियों के लिए दिया जाता है जिन्हें सुनकर लोग पहले हंसे और बाद में उसके बारे में सोचें।
अमेरिका के राइस विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ते फाये याप, झेन लिऊ, अनूप राजप्पन, ट्रेवर शिमोकुसू और डेनियल प्रेस्टन ने मृत मकड़ी का इस्तेमाल यंत्रों को पकड़ने वाले औजारों के इस्तेमाल के रूप में करने पर अनुसंधान किया।
भारतीय मूल के अनूप ने 2015 में मद्रास स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री हासिल की थी और उसके बाद अमेरिका जाकर मेसाचूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ाई की।
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