नयी दिल्ली, 30 जून एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि देश में लगभग 97 प्रतिशत सफाई कर्मचारियों, 95 प्रतिशत कचरा बीनने वालों और 82 प्रतिशत सुरक्षा गार्ड के अपने काम के दौरान वायु प्रदूषण की चपेट में आने का जोखिम है। इस अध्ययन की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई।
पर्यावरण से जुड़े गैर-सरकारी संगठन ‘चिंतन’ द्वारा कराया गया अध्ययन तीन आवश्यक समूहों - कचरा बीनने वाले, सफाई कर्मी और सुरक्षा गार्ड के लिए वायु प्रदूषण और श्वसन बीमारी के बीच सह-संबंधों का आकलन है।
अध्ययन में कहा गया है कि 60 प्रतिशत से अधिक सफाई कर्मचारी, 50 प्रतिशत कचरा बीनने वाले और 30 प्रतिशत सुरक्षा गार्ड "पीपीई किट के बारे में नहीं जानते जो उनके जोखिम (प्रदूषण से) को कम कर सकता है।"
अध्ययन में कहा गया है, "75 प्रतिशत कचरा बीनने वालों, 86 प्रतिशत स्वच्छता कर्मचारियों और 86 प्रतिशत सुरक्षा गार्डों में फेफड़े असामान्य रूप से काम कर रहे थे...।’’
इसमें कहा गया है कि 17 फीसदी कचरा बीनने वाले, 27 फीसदी सफाई कर्मी और 10 फीसदी सुरक्षा गार्ड फेफड़ों की गंभीर बीमारियों से पीड़ित मिले।
अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर एनजीओ ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और पीपीई किट के बेहतर उपयोग पर प्रशिक्षण की सिफारिश की है।
अध्ययन में कहा गया है कि नाक और गले से धूलकणों को बाहर निकालने के लिए ड्यूटी के बाद ऐसे लोगों को गरारे करने का सुझाव एवं प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
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