जरुरी जानकारी | पूर्वोत्तर के 13 उत्पादों के जीआई दर्जे के इस्तेमाल के लिए 800 किसान, उद्यमी अधिकृत

गुवाहाटी, 11 मई केंद्र सरकार की एक एजेंसी ने पूर्वोत्तर भारत के 13 उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) का इस्तेमाल करने के लिए 800 किसानों एवं उद्यमियों को अधिकृत कर दिया है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

जीआई का दर्जा पाने वाले इन उत्पादों में अरुणाचल का संतरा, असम की तेजपुर लिची एवं कार्बी आंगलांग अदरक, मणिपुर का कचई नींबू एवं चाक-हाओ काला चावल, मेघालय का खासी मंदारिन संतरा एवं मेमांग नारंग संतरा, मिजोरम की मिजो मिर्च, नगालैंड का नगा ट्री टमाटर एवं नगा मीठा खीरा, त्रिपुरा का क्वीन अन्ननास और सिक्किम की बड़ी इलायची एवं देल खुरसानी मिर्च शामिल हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के मंत्रालय के अधीन कार्यरत पूर्वोत्तर क्षेत्र कृषि विपणन निगम (नेरामैक) इन 13 उत्पादों के इस्तेमाल के लिए किए गए 800 आवेदनों को चेन्नई स्थित भौगोलिक संकेतक पंजीयन को भेजेगा।

नेरामैक के प्रबंध निदेशक कमोडोर राजीव अशोक (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह पहल पूर्वोत्तर इलाके के कृषि उत्पादों एवं परंपरागत पद्धतियों के प्रोत्साहन और संरक्षण की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे पूर्वोत्तर के कृषि उत्पादों की अनूठी खासियत को पहचान मिलेगी और उनका दुरुपयोग एवं नकल रोकने में मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि किसानों को जीआई दर्जे के इस्तेमाल के लिए अधिकृत करने से घरेलू एवं विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और उनकी आय भी बढ़ेगी।

प्रेम

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)