नयी दिल्ली, 27 मई इस साल अब तक राष्ट्रीय राजधानी में आग में झुलसने से 55 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 300 से अधिक लोग घायल हो गए। सोमवार को आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में आग में झुलसने से 16, फरवरी में 16, मार्च में 12, अप्रैल में चार और 26 मई तक सात लोगों की मौत हो गई।
आग लगने की घटनाओं के कारण जनवरी में 51, फरवरी में 42, मार्च में 62, अप्रैल में 78 और 26 मई तक 71 लोग घायल हुए।
एक जनवरी से 26 मई तक दिल्ली अग्निशमन सेवा को आग लगने से संबंधित 8,912 सूचनाएं प्राप्त हुईं।
आंकड़ों के मुताबिक 2023 में इसी अवधि के दौरान 36 लोगों की जान गई थी।
दिल्ली अग्निशमन सेवा के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ इस वर्ष आग लगने से संबंधित सूचनाएं 32.26 प्रतिशत बढ़ी हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल एक जनवरी से 26 मई तक आग लगने से संबंधित कुल 6,436 सूचनाएं मिली थीं, लेकिन इस वर्ष इसी अवधि के दौरान 8,912 सूचना मिली हैं।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले साल उपरोक्त अवधि के दौरान 36 लोगों की जान गई थी, इस साल अब तक कुल 55 लोगों की जान जा चुकी है।’’
रविवार को पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में बच्चों के एक निजी अस्पताल में भीषण आग लगने से छह नवजात शिशुओं की मौत हो गई।
आग शनिवार रात करीब 11:30 बजे ‘बेबी केयर न्यू बॉर्न’ अस्पताल में लगी और जल्द ही यह दो अन्य इमारतों में भी फैल गई।
दिल्ली अग्निशमन सेवा प्रमुख अतुल गर्ग ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया, ‘‘नवजात शिशु अस्पताल के पास आग सुरक्षा संबंधी कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं है और आग से निपटने की उचित व्यवस्था भी नहीं है। इसके अलावा, ऑक्सीजन सिलेंडर भी वहां रखे गए थे जो फट गए थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत हो या नहीं, सभी को हर प्रकार की इमारतों में आग से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने चाहिए। पानी की बौछार करने वाली प्रणाली लगाना शुरुआत में आग से निपटने और अग्निशामकों को सूचित करने के बेहतर तरीकों में से एक है।’’
इसी दिन पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके में एक चार मंजिला आवासीय इमारत में आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई।
इसके अलावा, 15 फरवरी को बाहरी दिल्ली के अलीपुर के दयालपुर बाजार में एक पेंट बनाने वाली फैक्टरी में विस्फोट और उसके बाद आग लगने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। घटना में चार लोग घायल हो गये थे।
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