ब्रिटेन ने 1997 में हांगकांग को चीन को सौंप दिया था। माना जाता है कि चीन के बस इसी क्षेत्र में प्रेस की स्वतंत्रता बरकरार है। यहां कई विदेशी मीडिया प्रतिष्ठानों के दफ्तर हैं जहां से एशिया और चीनी मुख्यभूमि की रिपोर्टिंग की जाती है।
पिछले साल यहां कई महीनों तक चले सरकार विरोधी प्रदर्शनों के चलते तथा असंतोष की आवाजों को दबाने के इरादे से 30 जून को नया कानून लागू कर दिया गया जिसके बाद से प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर यहां अनिश्चतता के हालात बने हुए हैं।
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इस कानून में कहा गया है कि हांगकांग की सरकार मीडिया और इंटरनेट समेत कई संस्थाओं के संबंध में ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों के नियमन और निगरानी, जन संवाद, मार्गदर्शन को मजबूत करने’’ के लिए काम करेगी।
न्यूयार्क टाइम्स का कहना है कि उसके कुछ कर्मचारियों को हांगकांग में काम करने के लिए इजाजत लेने में परेशाानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कुछ समय पहले तक ऐसी कोई परेशानी नहीं आती थी, हां मुख्यभूमि चीन में काम करने वाले पत्रकारों के लिए यह परेशानी नई नहीं है।
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न्यूयार्क टाइम्स के प्रबंधन ने मंगलवार को कर्मचारियों को भेजे एक परिपत्र में
कहा, ‘‘हांगकांग में चीन के नए सुरक्षा कानून ने इस बारे में बहुत भ्रम का माहौल बना दिया है कि हमारे कामकाज तथा पत्रकारिता को लेकर इन नियमों के क्या मायने होंगे। हमें लगता है कि आकस्मिक योजना बनाना और हमारे संपादन कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर भेजना आवश्यक है।’’
समूह हांगकांग में काम करने वाली अपनी डिजिटल टीम के एक तिहाई कर्मचारियों को अगले साल तक सियोल भेज देगा। संवाददाता यहीं बने रहेंगे।
एपी
मानसी शाहिद
शाहिद
1507 1633 हांगकांग
नननन बेहतर क्या हो सकता है।’’
उन्होंने कहा कि पुलिस इन ट्वीट पर भरोसा नहीं कर रही है क्योंकि इससे मामला बंद हो सकता है।
पाहवा ने कहा कि इसके बजाय वे गवाहों के बयान जिसे पुलिस ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-161 के तहत दर्ज किया है पर भरोसा कर रही है जिसमें उनकी मनोस्थिति को जानने के लिए पुष्कर के ट्वीट का संदर्भ दिया है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस को थरूर द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
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