मुंबई, 12 जून कोरोनो वायरस महामारी के व्यावधानों के चलते देश में डेयरी वस्तुओं के मूल्यवर्धित उत्पादों (वीएपी) की कमजोर मांग के कारण चालू वित्तवर्ष में भारतीय डेयरी क्षेत्र की आय पूर्वस्तर पर अटकी रह सकती है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
आइसक्रीम, पनीर, सुगंधित दूध, दही और योगट जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों (वीएपी) की बिक्री रल दूध की तुलना में अधिक लाभदायक हैं और संगठित डेयरी क्षेत्र की आय में एक तिहाई से अधिक का योगदान करती है। इनकी बिक्री में वर्ष 2020-21 में 2-3 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है। क्रिसिल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके कारण परिचालन मुनाफे में आधा से पौना प्रतिशत की कमी आ सकती है।
यह रिपोर्ट ऐसी 65 डेयरी इकाइयों के विश्लेषण पर आधारित है, जो संगठित डेयरी खंड के 1.5 लाख करोड़ रुपये की आय में दो-तिहाई से थोड़ा अधिक का योगदान रखती है। क्रिसिल इनकी वित्तीय साख निर्धारित करता है।
रपट के में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में सामान्य स्थिति बहाल हो सकती है।
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से होटल और रेस्तरां के दो महीने के लंबे समय तक बंद रहे। इससे मूल्यवर्धित उत्पादों की कारोबारी इकाइयों को बिक्री रुक गई । संगठित डेयरी खंड के राजस्व का लगभग 20 प्रतिशत इस तरह की बिक्री से आता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तरल दूध की बिक्री यथावत रहने से डेयरी क्षेत्र में बड़ी गिरावट से बचाव होगा। तरल दुध का हिस्सा, कुल दुग्ध उद्योग की बिक्री का दो-तिहाई होता है।
लॉकडाउन ने दूध की आपूर्ति को प्रभावित नहीं किया है क्योंकि यह एक आवश्यक उत्पाद है।
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