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रूस से अभी भी गैस क्यों खरीद रहा है यूरोप?

यूरोपीय संघ ने रूस से आयात की जाने वाली गैस की मात्रा में भारी कमी कर दी है, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं किया है.

रूस से अभी भी गैस क्यों खरीद रहा है यूरोप?
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

यूरोपीय संघ ने रूस से आयात की जाने वाली गैस की मात्रा में भारी कमी कर दी है, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं किया है. क्या यह ईयू की मजबूरी है या फिर कोई और वजह?रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुआ युद्ध दो साल बाद भी जारी है. यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोपीय संघ ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे और वहां से आयात की जाने वाली गैस की मात्रा को काफी कम कर दिया. इसका उद्देश्य था कि रूस को आर्थिक रूप से चोट पहुंचायी जाए.

इसके बावजूद, युद्ध शुरू होने के दो साल बाद भी रूसी गैस यूरोपीय संघ में पहुंच रही है. हालांकि, आयात की जाने वाली गैस की मात्रा काफी कम हो गई है, लेकिन इस गैस की वजह से ही कुछ यूरोपीय घरों और कारोबारों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा रहा है. साथ ही, रूस की कमाई भी जारी है.

रूसी गैस पर कितना निर्भर था यूरोप

दरअसल, यूरोपीय संघ लंबे समय से रूसी गैस और तेल पर निर्भर है. 2021 में यूरोपीय संघ में आयात की गई कुल गैस का 34 फीसदी हिस्सा रूस से आया था. युद्ध शुरू होने पर यूरोपीय नेताओं को इस निर्भरता को खत्म करने और इसे कम करने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

मध्य और पूर्वी यूरोप के देश विशेष रूप से रूस पर निर्भर थे. जब यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा, तो जर्मनी के चांसलर ओलाफ शॉल्त्स ने तुरंत इसका विरोध जताया. उन्होंने कहा, "यूरोप ने जानबूझकर रूस से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति को प्रतिबंधों से बाहर रखा है. फिलहाल, यूरोप में घरों को गर्म रखने, गाड़ियों को चलाने, बिजली आपूर्ति और उद्योगों को चलाने के लिए जरूरी ऊर्जा किसी और तरीके से हासिल नहीं की जा सकती.”

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस मौके का फायदा उठाया. 2022 के दौरान, रूस ने यूरोप को भेजी जाने वाली गैस की मात्रा कम कर दी. इससे यूरोप के नेताओं को सर्दियों में ऊर्जा की कमी का डर सताने लगा. हालांकि यह डर गलत साबित हुआ, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि यूरोपियन यूनियन ने रूसी गैस पर कभी पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया.

कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के बेंजामिन हिल्गेनस्टॉक ने डीडब्ल्यू से कहा, "रूसी गैस पर कभी प्रतिबंध लगाया ही नहीं गया. यह अलग-अलग देशों द्वारा स्वैच्छिक तौर पर लिया गया समझदारी भरा फैसला था कि वे अपनी ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाएं, ताकि रूस उन्हें डरा न सके और गैस सप्लाई रोककर परेशान न कर सके.”

पाइपलाइन से गैस आयात करने की जगह एलएनजी आयात करने का फैसला

यूरोपीय संघ के आंकड़ों के अनुसार, रूस से पाइपलाइन के जरिए गैस आयात करने वाले सदस्य देशों के लिए, कुल गैस आयात में रूस का हिस्सा 2021 में 40 फीसदी था, जो 2023 में कम होकर महज 9 फीसदी रह गया. हालांकि, अगर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) को भी शामिल कर लिया जाए, तो पिछले साल यूरोपीय संघ के कुल गैस आयात में रूसी गैस का कुल हिस्सा 15 फीसदी था. बता दें कि एलएनजी भी प्राकृतिक गैस है, जिसे तरल रूप में ठंडा करके जहाजों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है.

यूरोपीय संघ ने रूसी गैस पर निर्भरता कम करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और कतर जैसे देशों से एलएनजी का निर्यात बढ़ाया है. हालांकि, इससे भारी छूट पर दिया जाने वाला रूसी एलएनजी भी यूरोप पहुंचने लगा है.

आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी केप्लर के मुताबिक, रूस अब यूरोप को एलएनजी उपलब्ध कराने वाला दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. 2023 में रूस से एलएनजी आयात यूरोपीय संघ में कुल एलएनजी आपूर्ति का 16 फीसदी था, जो कि 2021 की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा है.

2023 में आयात की मात्रा 2022 से थोड़ी कम थी, लेकिन 2024 की पहली तिमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि यूरोप में रूसी एलएनजी का निर्यात साल-दर-साल फिर से 5 फीसदी बढ़ गया है. फ्रांस, स्पेन और बेल्जियम बड़े आयातक हैं. 2023 में यूरोपीय संघ में आयात किए गए एलएनजी का 87 फीसदी हिस्सा इन तीन देशों का था.

‘ट्रांस-शिपिंग' एलएनजी को रोकना चाहते हैं देश

हालांकि, इस एलएनजी की यूरोपीय बाजार में बहुत ज्यादा जरूरत नहीं है. इसे यूरोपीय बंदरगाहों पर रखा जा रहा है और दुनियाभर के कुछ और देशों को फिर से निर्यात किया जा रहा है. इससे यूरोपीय संघ के कुछ देशों और कंपनियों को फायदा हो रहा है.

हिल्गेनस्टॉक कहते हैं, "रूस से यूरोप आने वाले एलएनजी की भारी मात्रा को ‘ट्रांस-शिप' कर दिया जाता है. दूसरे शब्दों में कहें, तो ये गैस यूरोप में इस्तेमाल के लिए नहीं रखी जाती हैं, बल्कि इन्हें सीधे दूसरे देशों में ले जाने वाले जहाजों में ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसका मतलब यह हुआ कि ये गैस असल में यूरोप की गैस सप्लाई का हिस्सा नहीं बनती. यूरोप सिर्फ रूसी एलएनजी को आगे भेजने में मदद कर रहा है और इस प्रक्रिया में यूरोपीय कंपनियों को फायदा हो रहा है.”

अब रूसी एलएनजी पर प्रतिबंध की मांग

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में रूस से यूरोप में आयात किए गए एलएनजी का 22 फीसदी यानी करीब एक चौथाई हिस्सा वैश्विक बाजारों में भेजा गया. सीआरईए के साथ काम करने वाले ऊर्जा विश्लेषक पेट्रास कैटिनस ने डीडब्ल्यू को बताया कि इन एलएनजी का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों को बेचा गया.

इसका नतीजा यह हुआ है कि स्वीडन, फिनलैंड और बाल्टिक सागर के किनारे स्थित देश जैसे ईयू के सदस्य रूसी एलएनजी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का दबाव बना रहे हैं. हालांकि, इस प्रतिबंध के लिए ईयू के सभी सदस्य देशों की सहमति चाहिए होगी.

यूरोपीय संघ में फिलहाल इस बात पर चर्चा हो रही है कि यूरोपीय बंदरगाहों से रूसी एलएनजी के दोबारा निर्यात पर रोक लगाई जाए. समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के अनुसार, रूस की कुछ प्रमुख एलएनजी परियोजनाओं, जैसे आर्कटिक एलएनजी 2, यूएसटी लुगा एलएनजी टर्मिनल और मुरमांस्क संयंत्र पर भी प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है.

हिल्गेनस्टॉक ने कहा, "हमें मूल रूप से रूसी एलएनजी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए. हमें नहीं लगता कि इससे यूरोपीय गैस आपूर्ति में कोई खास मदद मिलती है. रूसी एलएनजी की जरूरत को अन्य स्रोत से मिलने वाली गैस से भी पूरा किया जा सकता है.” ब्रसेल्स में मौजूद थिंक टैंक ब्रूगल का 2023 का एक अध्ययन भी इस विश्लेषण का समर्थन करता है.

इसके बावजूद, यूरोपीय संघ के ऊर्जा नियामक एसर ने हाल में चेतावनी दी थी कि ऊर्जा संकट से बचने के लिए रूसी एलएनजी के आयात में ‘धीरे-धीरे कटौती' की जानी चाहिए.

पाइपलाइन से भी यूरोप में आयात की जा रही है रूसी गैस

रूसी गैस को अभी भी पाइपलाइन के जरिए यूरोपीय संघ में आयात किया जा रहा है. हालांकि, नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन चालू नहीं है और यमल पाइपलाइन से अब रूसी गैस को यूरोप में नहीं लाया जाता, लेकिन रूसी गैस अब भी यूक्रेन से होकर गुजरने वाली पाइपलाइन के जरिए ऑस्ट्रिया के बॉमगार्टन गैस हब तक पहुंच रही है. ऑस्ट्रिया की आंशिक रूप से सरकारी स्वामित्व वाली ओएमवी ऊर्जा कंपनी का रूसी ऊर्जा कंपनी गैजप्रोम के साथ 2040 तक का अनुबंध है.

इस साल फरवरी में, ऑस्ट्रिया ने पुष्टि की कि दिसंबर 2023 में उसका 98 फीसदी गैस आयात रूस से हुआ था. सरकार का कहना है कि वह गैजप्रोम के साथ अनुबंध को जल्द से जल्द तोड़ना चाहती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि यूरोपीय संघ रूसी गैस पर प्रतिबंध लगाए.

ऑस्ट्रिया की तरह हंगरी भी पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में रूसी गैस का आयात कर रहा है. हंगरी ने भी हाल ही में तुर्की के साथ गैस को लेकर एक सौदा किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्कस्ट्रीम के जरिए आने वाली यह गैस भी रूस की ही है.

हिल्गेनस्टॉक का कहना है कि कुछ देश रूसी गैस की खरीद इसलिए भी जारी रखे हुए हैं, क्योंकि उन्हें सस्ते और आकर्षक अनुबंधों से लाभ हो रहा है. इसलिए, जब तक रूसी प्राकृतिक गैस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है, तब तक गैस का आयात जारी रखना या उसे बंद करना पूरी तरह इन देशों पर निर्भर करता है.

ऑस्ट्रिया और हंगरी जैसे देशों तक पाइपलाइन के जरिए पहुंचने वाली गैस को आखिरकार यूक्रेन ही रोक सकता है. यूक्रेन ने जोर देकर कहा कि वह गैजप्रोम के साथ मौजूदा समझौतों को फिर से आगे नहीं बढ़ाएगा, जिनके तहत गैस उसके देश से होकर गुजरती है. यह समझौता 2024 के अंत में खत्म होने वाला है.

प्रतिबंध के लिए क्या सही हैं परिस्थितियां

रूसी गैस अभी भी यूरोप में आयात की जाती है, लेकिन इसकी कुल हिस्सेदारी 2021 के बाद से नाटकीय रूप से गिर गई है. यूरोपीय संघ का कहना है कि ईयू 2027 तक रूसी गैस से पूरी तरह छुटकारा पाना चाहता है. हिल्गेनस्टॉक का मानना है कि यह लक्ष्य अब काफी हद तक हासिल करने लायक लग रहा है.

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इस पूरे मामले ने हमें यही दिखाया है कि हम रूस के अलावा अन्य देशों से गैस और दूसरी ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति भी तेजी से पा सकते हैं.”

हालांकि, उनका मानना है कि फिलहाल पूरी तरह से गैस पर प्रतिबंध लगाने के लिए राजनीतिक परिस्थितियां ‘बहुत अनुकूल नहीं' हैं, खासकर पाइपलाइन के जरिए आने वाली गैस पर. वह 2024 के दूसरे छमाही में यूरोपीय संघ की अध्यक्षता करने वाले हंगरी को एक संभावित रुकावट के तौर पर देखते हैं. यूरोपीय संघ के अन्य देशों के मुकाबले हंगरी और रूस के बीच ज्यादा गहरे रिश्ते हैं.

हिल्गेनस्टॉक एलएनजी को लेकर ज्यादा आशावादी हैं और उनका कहना है कि यूरोपीय संघ के कदमों के अलावा, स्पेन और बेल्जियम जैसे एलएनजी के बड़े आयातक देशों को भी खुद कदम उठाने चाहिए. उन्होंने कहा, "पिछले दरवाजे से रूसी गैस आयात एक बड़ी समस्या है. हम रूस को उसकी एलएनजी आपूर्ति श्रृंखलाओं में मदद कर रहे हैं, जो हमें नहीं करना चाहिए.”

(The above story first appeared on LatestLY on May 01, 2024 06:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).