शेख हसीना का बड़ा आरोप! कहा- यूनुस नहीं चाहते लोकतंत्र मजबूत हो, भारत से दूरी बनाना खतरनाक कदम
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा अंतरिम प्रशासन और उसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा अंतरिम प्रशासन और उसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एक इंटरव्यू में हसीना ने दावा किया कि यूनुस देश में गैर-निर्वाचित लोगों का प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने फिर दोहराया कि बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं, जब सभी बड़ी पार्टियां शामिल हों. उनके मुताबिक, बिना अवामी लीग जैसे बड़े दल के चुनाव कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक होगा.
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भारत को लेकर हसीना का स्पष्ट संदेश
हसीना ने कहा कि भारत अच्छी तरह समझता है कि चुनाव तभी वैध माना जाएगा जब सभी प्रमुख राजनीतिक दल मैदान में हों. उनका कहना है कि अवामी लीग को बाहर रखकर करोड़ों वोटरों को अनदेखा करना किसी भी लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है. उन्होंने दावा किया कि भारत ढाका में एक भरोसेमंद और जनसमर्थन वाली सरकार चाहता है, न कि किसी ऐसी सत्ता को जो जनता की सहमति के बिना चल रही हो.
यूनुस की विदेश नीति पर भी सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री ने मोहम्मद यूनुस की विदेश नीति को लेकर भी गंभीर आशंका जताई. उन्होंने कहा कि भारत से संबंध कमजोर करना बांग्लादेश के हित में कभी नहीं हो सकता. हसीना ने बताया कि उनके शासनकाल में भारत और चीन दोनों के साथ संतुलित रिश्ते कायम रहे थे. लेकिन फिलहाल की नीति भारत से दूरी बनाकर चीन के साथ नज़दीकी बढ़ाने पर आधारित दिख रही है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है.
भारत-बांग्लादेश रिश्तों की बताई अहमियत
हसीना ने याद दिलाया कि भारत और बांग्लादेश 4000 किलोमीटर लंबी सीमा और सांस्कृतिक जुड़ाव साझा करते हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा से लेकर आर्थिक सहयोग तक, भारत बांग्लादेश के लिए सबसे भरोसेमंद साझेदार है. ऐसे में भारत से दूरी बनाना किसी भी रूप में देश के दीर्घकालिक हितों के अनुकूल नहीं है.
अल्पसंख्यकों पर हिंसा को बताया सोची-समझी साजिश
हसीना ने अगस्त 2024 के बाद हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे हमलों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह घटनाएं कोई सामान्य हिंसा नहीं बल्कि कट्टर तत्वों द्वारा रची गई एक योजनाबद्ध साजिश हैं, जिसे मौजूदा प्रशासन रोकने में नाकाम रहा है. उनका आरोप है कि सरकार की चुप्पी सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत का संकेत है.
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में सभी धर्मों के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती थी. लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि अल्पसंख्यक अपने घरों और धर्मस्थलों को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे हमलों पर चुप न रहा जाए और दबाव बनाया जाए ताकि बांग्लादेश में शांति और न्याय कायम रह सके.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 15, 2025 05:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

