Pakistan Army in Gaza: गाजा में अपनी सेना भेजने को तैयार हुआ पाकिस्तान, लेकिन हमास को लेकर रख दी यह बड़ी शर्त
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशन के तहत गाजा में अपनी सेना भेजने के लिए सहमति दे दी है, जिसकी पुष्टि विदेश मंत्री इशाक डार ने की है. हालांकि, पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि उनके सैनिक वहां सिर्फ शांति बनाए रखने (Peacekeeping) जाएंगे और हमास से हथियार डलवाने या लड़ने का काम नहीं करेंगे. सरकार ने यह फैसला सेना के बड़े अधिकारियों से सलाह लेने के बाद किया है और कहा है कि वे फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे.
पाकिस्तान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए गाजा में अपनी सेना भेजने की तैयारी कर ली है. पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इसकी पुष्टि की है. हालांकि, पाकिस्तान ने सेना भेजने के साथ ही एक बड़ी शर्त भी रख दी है. उन्होंने साफ कहा है कि पाकिस्तानी सैनिक गाजा में शांति बनाए रखने (Peacekeeping) के लिए जाएंगे, न कि हमास से लड़ने या उनसे हथियार डलवाने.
क्या है पाकिस्तान का पूरा प्लान?
शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इशाक डार ने बताया कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत अपने सुरक्षाबलों को तैनात करने के लिए तैयार है. यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना के बड़े अधिकारियों (फील्ड मार्शल) से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया है.
लेकिन डार ने दो टूक शब्दों में कहा, "पाकिस्तानी सेना हमास को हथियार डालने पर मजबूर नहीं करेगी. हम वहां शांति के लिए जा रहे हैं. हमास को निहत्था करना हमारा काम नहीं है, यह काम फिलिस्तीन की अपनी एजेंसियों का है."
'हमारा काम पीसकीपिंग का है, एनफोर्समेंट का नहीं'
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने समझाया कि उनकी भूमिका सिर्फ 'पीसकीपिंग' यानी शांति बनाए रखने की होगी. वे 'पीस एनफोर्समेंट' यानी जबरदस्ती शांति लागू करने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान किसी भी ऐसे मिशन का हिस्सा नहीं बनेगा जिसका मकसद हमास को खत्म करना या उनसे हथियार डलवाना हो.
सेना भेजने की शर्तें क्या हैं?
पाकिस्तान ने सेना भेजने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं:
- सेना तभी भेजी जाएगी जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का आदेश (Mandate) बिल्कुल स्पष्ट हो.
- मिशन का दायरा और काम साफ-साफ बताया जाना चाहिए.
- यह मिशन एक 'अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल' (ISF) के तहत होना चाहिए.
आपको बता दें कि इंडोनेशिया ने भी इस मिशन के लिए अपने 20,000 सैनिक भेजने की पेशकश की है.
पाकिस्तान क्यों बच रहा है हमास से उलझने से?
दरअसल, अमेरिका एक ऐसा फोर्स बनाना चाहता है जिसमें मुस्लिम देशों की सेनाएं शामिल हों. पिछले दिनों ऐसी अफवाहें थीं कि पाकिस्तान को हमास से हथियार डलवाने का काम सौंपा जा सकता है. इस खबर पर पाकिस्तान में काफी राजनीतिक हंगामा हुआ था और लोगों ने विरोध किया था.
पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीन मुद्दे का समर्थक रहा है और हमास को आतंकवादी संगठन नहीं मानता. इसलिए, पाकिस्तान सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. वे नहीं चाहते कि उनकी सेना गाजा में जाकर फिलिस्तीनी लोगों या हमास के खिलाफ खड़ी दिखाई दे.
UN और अमेरिका का क्या रोल है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाल ही में अमेरिका के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें गाजा में 'अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल' (ISF) की तैनाती की बात कही गई है. हालांकि, हमास ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान की इन शर्तों के बाद यह मिशन कैसे आगे बढ़ता है.