दक्षिण कोरिया में प्रवासी मजदूरों के साथ गुलामों सा बर्ताव?
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक जांच में पाया है खेतों में काम करने के लिए फिलीपींस से दक्षिण कोरिया जाने वाले मजदूरों के साथ कई तरह का शोषण किया जा रहा है.दक्षिण कोरिया की एक प्रवासी कामगार योजना के तहत फिलीपींस के अलावा नेपाल, वियतनाम, मंगोलिया, लाओस, कंबोडिया, उज्बेकिस्तान और थाइलैंड से भी कामगारों की भर्ती की जाती है. काम पाने वालों में ज्यादातर किसान और मछुआरे हैं. ये ज्यादा वेतन दिए जाने के वादे पर पांच से आठ महीने के लिए दक्षिण कोरिया आते हैं.

रॉयटर्स ने करीब एक दर्जन ऐसे लोगों से बात की और उनके अनुभव जाने. ज्यादातर लोगों ने बताया कि महीनों काम करने के बाद वे खाली हाथ घर लौटे. कामगारों ने बिचौलियों से जुड़े बुरे अनुभव भी साझा किए. उन्होंने बताया कि काम दिलवाने के बहाने बिचौलियों ने उनसे बहुत ज्यादा फीस ली, कइयों से तो काम दिलाने के बदले जमीन और खेत भी बंधक रखवा लिया, उनके पासपोर्ट और बाकी जरूरी कागजात जब्त कर लिए, जी-तोड़ काम करवाया और वादे के मुताबिक वेतन भी नहीं दिया.

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"गुलामों की तरह व्यवहार"

जॉइंट कमिटी ऑफ माइग्रेंट्स इन कोरिया (जेसीएमके), प्रवासी श्रमिकों के काम करने की स्थितियों में सुधार के लिए काम करने वाली एक संस्था है. इसके एक अधिकारी को जिकबो ने बताया, "यह साफतौर पर बताता है कि मौसमी कामगार मानव तस्करी और जबरन काम करवाए जाने के खतरों का सामना कर रहे हैं."

को जिकबो ने दक्षिण कोरिया की प्रवासी कामगार योजना को आधुनिक गुलामी का एक रूप बताया. उन्होंने कहा, "यह मौजूदा समय में मानव तस्करी जैसा है. ब्रोकर, मौसमी कामगारों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार कर रहे हैं."

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दक्षिण कोरिया की सरकार ने इन आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. फिलीपींस की सरकार ने बताया कि यह योजना द्विपक्षीय स्तर पर काम करती है. इसमें कम-से-कम 45 स्थानीय सरकारों ने हिस्सा लिया. सरकार के मुताबिक, स्थानीय स्तर के मामले उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते.

इस योजना के लिए फिलीपींस में स्थानीय सरकारों की 1,600 इकाइयां हैं, जो दक्षिण कोरियाई प्रशासन के साथ मिलकर काम करती हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, यह पता कर पाना मुश्किल है कि कितने श्रमिक प्रभावित हुए या फिर उनके साथ किस स्तर तक दुर्व्यवहार हुआ. हालांकि, फिलीपींस सरकार ने मार्च में घोषणा की है आगे से द्विपक्षीय समझौते से होकर ही लोगों को काम करने बाहर भेजा जाएगा.

झूठे वादे?

दक्षिण कोरिया ने 2022 में यह योजना शुरू की. इसके तहत अब तक 3,500 से ज्यादा फिलीपींस के लोगों की भर्ती की जा चुकी है. इन श्रमिकों को यह कहकर रिझाया गया था कि वे अपने गांव-शहर में जितना कमाते हैं, उससे पांच गुना तक ज्यादा कमाई कर पाएंगे.

दक्षिण कोरिया में बूढ़ी होती आबादी और सिकुड़ती जनसंख्या के कारण काम करने वालों की कमी है. इस कमी को पूरा करने में प्रवासी मजदूरों का योगदान बहुत अहम है. स्थानीय लोग जिन कम आय वाली नौकरियों के लिए राजी नहीं होते, वहां भी प्रवासियों की खासी संख्या है.

रॉयटर्स ने दक्षिण कोरिया में काम कर चुके फिलीपींस के 12 मौसमी श्रमिकों के कागजातों की पड़ताल की और पाया कि अनुबंधों में व्यवस्थित तरीके से उल्लंघन किया गया. कई लोगों ने बताया कि वे अपने साथ हो रहे शोषण के खिलाफ कुछ भी बोलने से डरते थे. उन्हें डर था कि विरोध करने या आवाज उठाने पर उन्हें आगे काम करने के मौके नहीं मिलेंगे.

कामगारों की मुख्य शिकायतें हैं: वेलफेयर से जुड़े नियमों का उल्लंघन, बिचौलियों की ऊंची फीस, काम करने की बेहद मुश्किल स्थितियां, कम भुगतान और किसी भी तरह की सुनवाई न होना.

काम करने की अमानवीय स्थितियां

ऐसे ही एक श्रमिक हैं युआन (बदला हुआ नाम), जो फिलीपींस में धान की खेती करते हैं. उन्हें दक्षिण कोरिया जाकर काम करने पर करीब 750 डॉलर के बराबर मासिक वेतन का आश्वासन दिया गया था. जब वह दक्षिण कोरिया पहुंचे, तो उन्हें घास काटने का काम दिया गया.

इसके लिए उन्हें दो घंटे की चढ़ाई करके एक पहाड़ी पर चढ़ना पड़ता था और झुलसाने वाली गर्मी में काम करना पड़ता था. उन्होंने यह सोचकर बिचौलिये से शिकायत की कि शायद उनका काम बदल दिया जाएगा. लेकिन अगले ही दिन उन्हें वापस फिलीपींस लौट जाने के लिए कह दिया गया.

युआन बताते हैं, "ब्रोकर ने हमें फिलीपींस लौटने के लिए मजबूर किया. उन्होंने स्थानीय सरकार से कहा कि हम घर लौटना चाहते हैं, लेकिन यह सच नहीं था. उन्होंने हमारा कोलेट्रल लौटाने से इनकार कर दिया."

ब्रोकर काम की तलाश में विदेश जाने वाले श्रमिकों से सुरक्षा के तौर पर पैसा या जमीन लेते हैं. युआन को नौकरी का करार देने के बदल बिचौलिये ने उनका पांच एकड़ खेत अपने पास रख लिया. फिलीपींस लौटकर अपनी जमीन वापस पाने के लिए युआन को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. इसमें करीब चार महीने खर्च हुए और वकील को मोटी फीस भी देनी पड़़ी.

एसएम/आरपी (रॉयटर्स)