मिस्र में आयोजित शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोककर दक्षिण एशिया में लाखों लोगों की जान बचाई. इसी के साथ उन्होंने ट्रंप को शांतिप्रिय व्यक्ति (Man of Peace) बताते हुए उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की मांग की. शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित भी किया है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका बल्कि संघर्षविराम भी सुनिश्चित कराया.
ट्रंप ने अपना भाषण समाप्त करने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बोलने के लिए बुलाया. माइक मिलते ही शहबाज शरीफ ट्रंप की तारीफों के पुल बांधने लगे.
शर्म अल-शेख में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शरीफ ने अपने पांच मिनट के भाषण में कहा, “यह समकालीन इतिहास का सबसे महान दिन है, क्योंकि शांति हासिल की गई है. ट्रंप ने दिन-रात मेहनत कर इस शांति को संभव बनाया है. वे वाकई में शांति के सच्चे दूत हैं.”
मिस्र के मंच से ट्रंप को खुश करने में लगे पाक पीएम
“लाखों लोगों की जान बचाई गई”
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा, “ट्रंप ने दक्षिण एशिया में लाखों लोगों की जान बचाई है. और आज गाजा में शांति स्थापित करने के प्रयास से उन्होंने मध्य पूर्व में भी करोड़ों लोगों की उम्मीद जगाई है.” उनका यह बयान उस समय आया जब इजरायल ने भी ट्रंप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार 2026 में समर्थन जताया है.
“दुनिया को आज ट्रंप जैसे नेता की जरूरत”
शरीफ ने कहा कि ट्रंप इस समय दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरी नेता हैं. उन्होंने कहा, “मैं उनकी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता को सलाम करता हूं. दुनिया उन्हें उस शख्स के रूप में याद रखेगी जिसने आठ युद्धों को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया.”
भारत-पाक तनाव में ट्रंप की भूमिका पर सवाल
भारत और पाकिस्तान के बीच कई बार बढ़ते तनाव को शांत करने में अमेरिकी मध्यस्थता की भूमिका पहले भी चर्चा में रही है. लेकिन यह पहली बार है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुले मंच से ट्रंप को इसके लिए श्रेय दिया है. हालांकि भारत इन दावों को हमेशा से खारिज करता आया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर हमेशा स्पष्ट कर दिया है कि इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी. भारत हमेशा कहता आया है कि भारत ने कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा.













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