Iran-US-Israel War: ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़रायल संघर्ष के बीच कौन किसके साथ? क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और 'लायंस रोर' के तहत अब तक का सबसे बड़ा सैन्य हमला शुरू किया है. जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागकर क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत कर दी है
Iran-US-Israel War: मध्य पूर्व की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच दशकों से चला आ रहा 'छाया युद्ध' (Shadow War) अब सीधे और भीषण सैन्य संघर्ष में बदल गया है. 28 फरवरी 2026 की सुबह, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक समन्वित सैन्य अभियान के तहत ईरान के परमाणु केंद्रों, मिसाइल ठिकानों और रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के मुख्यालयों पर हमला बोल दिया. इजरायल ने इस मिशन को 'ऑपरेशन लायंस रोर' और अमेरिका ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया है. इस हमले में 200 से अधिक लड़ाकू विमानों और नौसैनिक संपत्तियों का उपयोग किया गया है.
ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' और 'लायंस रोर'
यह सैन्य अभियान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने और वहां शासन परिवर्तन की नींव रखने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "प्रमुख युद्धक अभियान" घोषित किया है. यह भी पढ़े: Ayatollah Ali Khamenei Dies: अमेरिका के दावे के बीच ईरानी स्टेट मीडिया की पुष्टि, US-इज़रायल के हमले में ईरान के ‘सुप्रीम लीडर’ खामेनेई की मौत
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इजरायल का लक्ष्य: तेहरान और नतांज़ जैसे परमाणु संवर्धन स्थलों को निशाना बनाकर इजरायल के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को खत्म करना.
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अमेरिका का लक्ष्य: ईरान के मिसाइल उद्योग और नौसेना को पंगु बनाना ताकि क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव बना रहे.
ईरान का पलटवार: 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4'
तेहरान ने इस हमले का जवाब 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के साथ दिया है. ईरान ने पहली बार बहरीन, कतर और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को सीधे निशाना बनाया है. ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत की खबरों के बीच, ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी कर दी है. इस मार्ग से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, जिसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है.
वैश्विक गुटबंदी: कौन किसके साथ?
मौजूदा संघर्ष ने दुनिया को दो स्पष्ट गुटों में बांट दिया है:
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पश्चिमी गठबंधन: अमेरिका और इजरायल मुख्य हमलावर हैं, जिन्हें ब्रिटेन का खुफिया समर्थन प्राप्त है.
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प्रतिरोध की धुरी (Axis of Resistance): ईरान के साथ हिजबुल्लाह (लेबनान), हूत विद्रोही (यमन) और इराक के मिलिशिया समूह सक्रिय रूप से युद्ध में शामिल हैं.
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तटस्थ और राजनयिक पक्ष: रूस और चीन ने हमले की निंदा की है लेकिन अभी सैन्य रूप से शामिल नहीं हुए हैं. भारत और सऊदी अरब ने संयम बरतने की अपील की है.
तीसरे विश्व युद्ध का खतरा?
सैन्य विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध जमीन (Ground Invasion) तक पहुंचता है, तो रूस और चीन जैसे परमाणु संपन्न देश ईरान के समर्थन में सीधे उतर सकते हैं. इसके अलावा, साइबर युद्ध के जरिए पश्चिमी देशों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना इसे वैश्विक सुरक्षा संकट बना सकता है.
भारत के लिए चिंता और नागरिकों को चेतावनी
भारत के लिए यह संकट अत्यंत गंभीर है क्योंकि खाड़ी देशों में लगभग 80 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने "अधिकतम संयम" बरतने का आह्वान किया है. एयर इंडिया और इंडिगो सहित भारतीय एयरलाइंस ने क्षेत्र के लिए सभी उड़ानें निलंबित कर दी हैं. कई देशों ने अपने नागरिकों को तत्काल ईरान और इजरायल छोड़ने की सलाह दी है.
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि मध्य पूर्व का नक्शा बदल रहा है. अगले 24 घंटे यह तय करेंगे कि यह संघर्ष एक क्षेत्रीय लड़ाई तक सीमित रहता है या एक पूर्ण विकसित वैश्विक महायुद्ध का रूप लेता है.