ब्रिटेन के अब तक के सबसे बुजुर्ग राजा की ताजपोशी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

चर्च की घंटियों और बिगुलों की खास धुनों और तोप के गोलों की आवाज जब धरती से लेकर जल और आकाश तक गूंज रही थी, तब "गॉड सेव द किंग" के नारों के बीच किंग चार्ल्स के सिर पर खालिस सोने से बना सेंट एडवर्ड क्राउन रखा गया.लंबे इंतजार के बाद ब्रिटेन के राजा बने किंग चार्ल्स तृतीय की आखिरकार 6 मई को ताजपोशी हो गई. 70 साल पहले चार साल की उम्र में किंग चार्ल्स ने अपनी मां को ब्रिटेन की रानी बनते देखा था. 1200 साल की ब्रिटिश राजशाही में किंग चार्ल्स 62वें राजा हैं. ब्रिटेन के राजसिंहासन पर 70 साल तक रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने राज किया.

पिछले साल उनकी मौत के बाद किंग चार्ल्स को यह गद्दी मिली. इस लिहाज से 1937 के बाद पहली बार ब्रिटेन को राजा मिला है. किंग चार्ल्स की ताजपोशी ब्रिटेन के इतिहास में सबसे बुजुर्ग राजा की ताजपोशी है. उनसे पहले 1830 में विलियम चतुर्थ सबसे अधिक उम्र में ब्रिटेन के राजा बने थे. विलियम चतुर्थ की उम्र तब 64 साल 208 दिन थी. किंग चार्ल्स 2022 में जब राजा बने तब उनकी उम्र 73 साल 298 दिन थी.

लंदन के ऐतिहासिक गिरजाघर वेस्टमिंस्टर एबी में अब तक ब्रिटेन के 39 राजा रानियों की ताजपोशी की जा चुकी है. ब्रिटेन का राजा वहां की सारी चर्चों का सर्वोच्च गवर्नर भी होता है इसलिए ताजपोशी हमेशा से चर्च में होती आयी है. 70 साल बाद हुई ये ताजपोशी कई मायनों में अभूतपूर्व है. एक ताजपोशी से दूसरी के बीच इतने सालों का अंतर कभी नहीं रहा. क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने ब्रिटेन पर कुल 70 साल 214 दिन तक शासन किया. किंग चार्ल्स को अपनी मां के मुकाबले ज्यादा धार्मिक और जातीय विविधता के साथ ही कमजोर ब्रिटेन मिला है.

अभूतपूर्व ताजपोशी

आर्चबिशप ऑफ कैंटरबरी जस्टिन वेल्बी के नेतृत्व में करीब दो घंटे चली ताजपोशी के रिवाजों में ज्यादातर तो पुरानी ही थी लेकिन इनके साथ कई नई चीजों को भी शामिल किया गया. पर्यावरण, इकोसिस्टम और जैव विविधता के लिए काम करते रहे प्रिंस चार्ल्स की ताजपोशी के कार्यक्रम में इस लिहाज से खास बनाने की कोशिश की गई. कार्यक्रम के लिए सिर्फ मौसमी फूलों और पत्तियों को इस्तेमाल किया गया. ताजपोशी में पुराने परिधानों को ही पहना गया यहां तक कि राजा पर छिड़कने के लिए इस्तेमाल होने वाला तेल भी शाकाहारी था.

पहली बार इस दौरान चर्च में महिला बिशप भी मौजूद थीं. इतना ही नहीं ब्रिटेन के गैर ईसाई धर्मों को मानने वाले और सेल्टिक भाषी लोगों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई. प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के रूप में पहली बार एक भारतीय मूल के और हिंदू नेता ने इस मौके पर बाइबिल की कुछ पंक्तियों को पढ़ने की रिवायत पूरी की. चर्च के अंदर मौजूद राजपरिवार के सदस्यों और खास मेहमानों की भीड़ में कुछ आमलोगों को भी शामिल किया गया था.

ताजपोशी का खर्च

ताजपोशी के कार्यक्रम पर होने वाले खर्च के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया है. हालांकि किफायत बरतने के बावजूद माना जा रहा है कि इस आयोजन पर करीब 5 से 10 करोड़ पाउंड खर्च हुए. ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और आमलोग बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट के दौर में भारी दिक्कतों को सामना कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में इस शाहखर्ची के साथ ताजपोशी करने की आलोचना भी हो रही है.

ब्रिटेन का राजा अब भी आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ के 13 और देशों का राष्ट्रप्रमुख है. औपनिवेशिक शासन खत्म हो जाने के बावजूद ब्रिटेन के अधीन रहे देशों और दुनिया के बाकी हिस्सों में भी ब्रिटिश राजशाही के लिए खास दिलचस्पी जब तब दिखाई देती रही है. किंग चार्ल्स की ताजपोशी के मौके पर भी दुनिया भर से लोग लंदन आये हैं. इनमें सरकारी प्रतिनिधियों, राजनीतिज्ञों और राजपरिवारों के लोगों के अलावा आम लोगों की भी एक बड़ी संख्या है.

लंदन की सड़कों पर उमड़े हजारों लोगों ने सेंट्रल लंदन को नीले, लाल और सफेद रंगों में रंग दिया है. हर तरफ यूनियन जैक लहरा रहा है. ताजपोशी का कार्यक्रम सादा और आडंबर से दूर रखने का वादा किया गया था लेकिन आमलोगों के उत्साह ने इसे भीगे मौसम के बावजूद रंगीन बना दिया है. बकिंघम पैलेस के बाहर मॉल में तो ताजपोशी के बहुत पहले से ही पार्टी शुरू हो गई. वहां टेंट लगा कर एक-दो दिन पहले से ही लोग जुट गये और जश्न शुरू हो गया था.

राजशाही का विरोध

शनिवार को लंदन की पुलिस ने ताजपोशी से महज कुछ घंटों पहले राजशाही का विरोध करने वाले गुट रिपब्लिक के प्रमुख को कई प्रदर्शनकारियों समेत गिरफ्तार कर लिया. ये लोग राजा की शोभायात्रा के मार्ग में विरोध प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए थे. रिपब्लिक ने पहले कहा था कि वह ब्रिटिश राजशाही के खिलाफ सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी. हालांकि लंदन के पुलिस प्रमुख ने शुक्रवार को ही चेतावनी दे दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों ने लोगों के उत्सव और खुशियों में खलल डाला तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.

पीली जर्सी पहने रिपब्लिक के कार्यकर्ता लंदन की सड़कों पर विरोध करने निकले थे. उनकी मांग है कि आधुनिक संवैधानिक लोकतंत्र में महंगी राजशाही का खर्च उठाने की कोई जरूरत नहीं है. मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इन लोगों की गिरफ्तारी की निंदा की है और इसे 'बेहद चिंताजनक' कहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है, "यह कुछ ऐसा है जिसे आप मॉस्को में देखने की उम्मीद करते हैं लंदन में नहीं."

एनआर/एमजे (एएफपी)