एक्टिव मोड में ट्रंप! पहले पुतिन से मुलाकात फिर अब जेलेंस्की से फोन पर बात, खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध?
(Photo : X)

नई दिल्ली. दुनिया की नज़रें एक बार फिर अमेरिका, रूस और यूक्रेन पर टिकी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की अलास्का में हुई मीटिंग के ठीक बाद, अब ट्रंप यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से फोन पर बात कर रहे हैं. यह सब यूक्रेन में तीन साल से चल रहे भयानक युद्ध को रोकने की एक बड़ी कोशिश की तरह देखा जा रहा है. लेकिन क्या सच में शांति आने वाली है? आइए, इस पूरी हलचल को आसान भाषा में समझते हैं.

अलास्का में क्या हुआ?

कल, यानी 15 अगस्त 2025 को, ट्रंप और पुतिन अलास्का में मिले थे. दोनों नेताओं के बीच यह मीटिंग लगभग तीन घंटे तक चली. मीटिंग का मुख्य मुद्दा यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का रास्ता खोजना था.

मीटिंग के बाद ट्रंप ने इसे "बहुत अच्छी" बताया और कहा कि दोनों देशों ने "बड़ी प्रोग्रेस" की है. हालांकि, इस बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. न तो युद्ध रोकने (सीजफायर) का कोई ऐलान हुआ और न ही कोई शांति समझौता हुआ. ट्रंप ने यह भी कहा कि अब फैसला यूक्रेन को करना है, यानी "गेंद ज़ेलेंस्की के पाले में है".

दिलचस्प बात यह है कि इस मीटिंग में पुतिन का तो रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया गया, लेकिन ज़ेलेंस्की को बुलाया तक नहीं गया. इस बात से कई लोग हैरान हैं.

अब ज़ेलेंस्की से फोन पर बात क्यों?

पुतिन से मिलने के बाद ट्रंप ने कहा था कि वो ज़ेलेंस्की और NATO (नाटो) के नेताओं को फोन करके मीटिंग की जानकारी देंगे. अभी जो फोन कॉल चल रही है, वो इसी वादे का हिस्सा है. माना जा रहा है कि इस कॉल में ट्रंप, ज़ेलेंस्की को पुतिन के साथ हुई बातचीत के बारे में बता रहे हैं. शायद वो शांति के लिए अगले कदमों पर भी चर्चा कर रहे हों, जैसे कि सैनिकों को पीछे हटाना या किसी समझौते पर पहुंचना.

क्या यह सिर्फ दिखावा है?

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप और पुतिन की यह मीटिंग असलियत से ज़्यादा दिखावा थी. ऐसा लगा कि पुतिन अपनी शर्तों पर अड़े रहे और रूस ने कोई रियायत नहीं दी. दूसरी तरफ, यूक्रेन का साफ कहना है कि उनकी सहमति के बिना कोई भी डील मंजूर नहीं होगी. ज़ेलेंस्की कई बार कह चुके हैं कि वो अपने देश की एक इंच ज़मीन भी नहीं छोड़ेंगे.

इस शक को और बढ़ावा तब मिला जब मीटिंग के दौरान ही रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन से हमले जारी रखे. यह दिखाता है कि ज़मीन पर हालात अभी भी बहुत तनावपूर्ण हैं.

ट्रंप यह सब क्यों कर रहे हैं?

डोनाल्ड ट्रंप खुद को एक "डील मेकर" के तौर पर देखते हैं. अगर वो इस बड़े युद्ध को रुकवा पाते हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत होगी. कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि उनकी नज़र नोबेल शांति पुरस्कार पर हो सकती है.

हालांकि, उनके विरोधी और यूक्रेन के समर्थक उनकी आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि ट्रंप, पुतिन के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं और यूक्रेन पर शांति के लिए दबाव बना रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर भी लोग बंटे हुए हैं. कुछ ट्रंप को शांति दूत बता रहे हैं, तो कुछ इसे सिर्फ एक पॉलिटिकल स्टंट कह रहे हैं.

फिलहाल, ट्रंप और ज़ेलेंस्की के बीच फोन पर बात चल रही है. पूरी दुनिया को उम्मीद है कि इस बातचीत से कोई अच्छी खबर निकलेगी, ताकि तीन साल से चल रहा यह विनाशकारी युद्ध खत्म हो सके, जिसमें लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.