56 फीसदी यूरोप चाहता है ईयू और बड़ा हो जाए
यूरोपीय संघ (ईयू) की विस्तार नीति चर्चा का विषय बनी हुई है.
यूरोपीय संघ (ईयू) की विस्तार नीति चर्चा का विषय बनी हुई है. यूक्रेन पर रूस के हमले ने चर्चा को और गति दी है. उम्मीदवार देशों और सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि 4 नवंबर को ब्रसेल्स में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे.4 नवंबर को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) का एक बड़ा सम्मेलन होने जा रहा है. सम्मेलन का अजेंडा है, ईयू का विस्तार. शिखर सम्मेलन में उम्मीदवार देशों के नेता ईयू अधिकारियों के साथ इस प्रक्रिया की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे.
फिलहाल, नौ देश ईयू में शामिल होना चाहते हैं. सदस्यता की प्रक्रिया में उनकी उम्मीदवारी का स्टेटस अलग-अलग स्तर पर है. नौ में से सात देशों की 'एक्सेशन प्रक्रिया' पर बातचीत शुरू हो चुकी है.
ईयू के साझा मूल्यों के मुताबिक ढलने की शर्त
जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यूरोपीय संघ (ईयू) की विस्तार नीति से आशय है नए देशों को सदस्य बनाने की प्रक्रिया. इसका मकसद ईयू के अंदर ज्यादा देश शामिल करके राजनीतिक, आर्थिकऔर सामाजिक सहयोग बढ़ाना है.
सदस्य बनने की प्रक्रिया काफी विस्तृत है. आवेदक देशों को अपनी व्यवस्था में सुधार और यूरोपीय संघ के साझा मूल्यों के मुताबिक एकरूपता लानी होती है.
इनमें मुक्त बाजार, लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव जैसी शर्तें शामिल हैं. एक लंबी प्रक्रिया के तहत उन्हें खुद को ईयू के मापदंडों के मुताबिक ढालना होता है.
क्या है ईयू में विस्तार की प्रक्रिया?
ईयू के मुताबिक, सदस्य देशों को कई तरह के फायदे होते हैं. इनमें राजनीतिक स्थिरता, नागरिकों को ईयू में कहीं भी रहने, पढ़ने और काम करने की आजादी, साझा बाजार के कारण कारोबार में इजाफा, ज्यादा निवेश और बेहतर जीवनस्तर जैसे पक्ष शामिल हैं.
सदस्यता प्रक्रिया के तीन मुख्य चरण हैं. पहला, उम्मीदवारी. सदस्य बनने का इच्छुक देश यूरोपीय परिषद में आवेदन देता है. फिर परिषद, यूरोपीय आयोग से समीक्षा करने को कहता है कि आवेदक देश सदस्यता की शर्तों को पूरा करने में समर्थ है कि नहीं.
आयोग की अनुशंसा पर यूरोपीय परिषद आवेदन का स्टेटस तय करता है. इसके बाद ईयू में प्रवेश की आधिकारिक बातचीत शुरू होती है.
क्या ईयू देशों के नागरिक विस्तार के पक्ष में हैं?
'यूरोबैरोमीटर' का हालिया सर्वेक्षण बताता है कि यूरोप के 56 फीसदी नागरिक विस्तार का समर्थन करते हैं. सबसे अधिक समर्थन स्वीडन (79 फीसदी), डेनमार्क (75 फीसदी) और लिथुआनिया (74 फीसदी) में है. वहीं ऑस्ट्रिया (45 फीसदी), चेक रिपब्लिक (43 फीसदी) और फ्रांस (43 फीसदी) में सबसे कम लोग सहमत हैं.
युवाओं में विस्तार का समर्थन सबसे ज्यादा है. 15 से 24 साल के आयुवर्ग में 67 फीसदी और 25 से 39 साल के 63 फीसदी लोग इससे सहमत हैं. कोरिना श्ट्रातुलात, यूरोपियन पॉलिसी सेंटर की एसोसिएट डायरेक्टर हैं. उन्होंने 'यूरो न्यूज' से बातचीत में कहा, "समर्थन बड़ी हद तक युवा और शिक्षित लोगों से आया है. यह आश्चर्य की बात नहीं है. अब सवाल यह है कि किस तरह कम शिक्षित मतदाताओं को भी इस प्रक्रिया के समर्थन में लाया जाए."
सर्वेक्षण के हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने विस्तार के संभावित फायदों पर भी गौर किया. 37 फीसदी प्रतिभागियों का मानना है कि यह दुनिया में ईयू की स्थिति और प्रभाव को मजबूत करेगा. इतने ही प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि ईयू में विस्तार, यूरोपीय बाजार को मजबूती देगा.
30 फीसदी लोगों ने भरोसा जताया कि इससे सदस्य देशों के बीच एकजुटता बढ़ेगी. हालांकि, श्ट्रातुलात रेखांकित करती हैं, "सार्वजनिक समर्थन के बावजूद, इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता जरूरी है."
लोगों में पॉलिसी के लिए चिंता भी है
40 फीसदी लोग अनियंत्रित आप्रवासन को लेकर चिंतित हैं, 39 फीसदी भ्रष्टाचार और अपराध के जोखिम की बात करते हैं. 37 फीसदी प्रतिभागियों का मानना है कि विस्तार पर टैक्स देने वालों का पैसा खर्च होगा, जो उचित नहीं होगा.
सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 44 फीसदी लोगों ने कहा कि राजनीतिक विस्तार को सफल बनाने के लिए कानून का शासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम जरूरी हैं. 38 फीसदी लोगों ने कहा कि वे चाहते हैं उम्मीदवार देश, ईयू सुधारों और नीतियों को लागू करने का वचन दें.
सर्वे में यह सुझाव भी दिया गया कि सदस्य बनने के मानदंड और मजबूत किए जाएं, ताकि उम्मीदवार देश ईयू के मानकों को पूरी तरह अपनाएं.
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कौन से देश हो सकते हैं शामिल?
यूरोपीय संघ के विस्तार पर चर्चा के लिए चार नवंबर को ब्रसेल्स में होने वाले यूरोन्यूज सम्मेलन में कई उम्मीदवार देशों के नेता शामिल होंगे. सम्मेलन में मोल्दोवा की राष्ट्रपति माया सांडू, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्सांदर वूचिच, अल्बानिया के प्रधानमंत्री एडी रामा, मोंटेनेग्रो के प्रधानमंत्री मिलोयको स्पायिच और उत्तर मैसेडोनिया के प्रधानमंत्री ह्रिस्तियान मिकोस्की भाग लेंगे.
इसके साथ ही यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा भी यूरोपीय संघ की ओर से प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में वहां मजूद होंगे. यह सम्मेलन सदस्य देशों और उम्मीदवार राष्ट्रों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 29, 2025 12:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

