What is 'Modi script': क्या है 'मोदी लिपि'? वो प्राचीन भारतीय लेखन पद्धति, जिसे अब AI के जरिए फिर से जिंदा किया जा रहा
जब भी हम भारत की ऐतिहासिक धरोहर की बात करते हैं, तो सिर्फ किले, मंदिर या पांडुलिपियां ही नहीं, बल्कि उन पांडुलिपियों में लिखी लिपियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं. ऐसी ही एक लिपि है 'मोदी लिपि'.
What is 'Modi script': जब भी हम भारत की ऐतिहासिक धरोहर की बात करते हैं, तो सिर्फ किले, मंदिर या पांडुलिपियां ही नहीं, बल्कि उन पांडुलिपियों में लिखी लिपियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं. ऐसी ही एक लिपि है 'मोदी लिपि', जिसे अब IIT रुड़की की नई तकनीक ने फिर से चर्चा में ला दिया है. तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है मोदी लिपि और क्यों इसे पढ़ना इतना जरूरी हो गया है? मोदी लिपि कोई नई खोज नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी से लेकर 20वीं सदी की शुरुआत तक महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी कामकाज और प्रशासनिक लेखन में इस्तेमाल होने वाली लिपि है.
इसे खासतौर पर छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया. दस्तावेज़ों में राजा के आदेश, ज़मीन के पट्टे, राजस्व रसीदें, औषधीय नुस्खे और व्यापारिक लेन-देन सभी कुछ इसी लिपि में लिखा जाता था.
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दुनिया का पहला AI मॉडल जो 'मोदी लिपि' को देवनागरी में पढ़ेगा
IIT Roorkee develops the world’s first AI model to transliterate the historic Modi script into Devanagari.#IITRoorkee pic.twitter.com/QQBUDh3rL0
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 18, 2025
क्यों है ये लिपि आज खास?
'मोदी' शब्द का अर्थ है 'संक्षिप्त'. यह लिपि वास्तव में देवनागरी से विकसित हुई एक तेज और सहज लेखन पद्धति है, जो अधिकतर हस्तलिखित रिकॉर्ड्स में मिलती है. इसका मुख्य उद्देश्य था काम को तेजी से निपटाना. भारत में आज भी 4 करोड़ से ज्यादा दस्तावेज मोदी लिपि में लिखे हुए हैं, लेकिन अफसोस कि इन्हें पढ़ने वाले विशेषज्ञ बहुत कम बचे हैं. यही वजह है कि देश की एक बड़ी ऐतिहासिक धरोहर गुमनामी में जा रही थी.
लेकिन अब IIT रुड़की ने इस दिशा में बड़ी पहल करते हुए एक AI टूल 'MoScNet' तैयार किया है, जो पुराने मोदी लिपि के दस्तावेजों को देवनागरी में ट्रांसलिटरेट करता है, यानी इसे पढ़ने लायक बनाता है.
मोदी लिपि और तकनीक का संगम
AI की मदद से अब इतिहास को डिजिटल रूप में सहेजा जा रहा है. मोदी लिपि में लिखे गए ग्रंथ, कानून, चिकित्सा और विज्ञान से जुड़े दस्तावेज न सिर्फ पढ़े जाएंगे, बल्कि इन पर शोध और अनुवाद भी संभव हो पाएंगे. इससे भारतीय ज्ञान परंपरा को एक नई जिंदगी मिलेगी.
क्योंकि मोदी लिपि सिर्फ एक लेखन शैली नहीं, भारत की सांस्कृतिक और प्रशासनिक विरासत का एक जिंदा सबूत है. इसे बचाने और आम लोगों तक लाने में अब तकनीक अहम भूमिका निभा रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 18, 2025 05:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

