टेक

मौत के बाद दोबारा जीने का मौका! 2 करोड़ रुपये में शरीर को फ्रीज कर भविष्य में जिंदा कर देगी जर्मन कंपनी

जर्मनी की कंपनी 'टुमॉरो बायो' लगभग ₹2 करोड़ में इंसान के शरीर को मौत के बाद फ्रीज करने की सर्विस दे रही है. इसका मकसद भविष्य की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग करके व्यक्ति को दोबारा जीवन देना है. हालांकि, यह तकनीक अभी प्रायोगिक है और वैज्ञानिक इसकी सफलता को लेकर निश्चित नहीं हैं.

मौत के बाद दोबारा जीने का मौका! 2 करोड़ रुपये में शरीर को फ्रीज कर भविष्य में जिंदा कर देगी जर्मन कंपनी

क्या हो अगर मौत अंत न हो? क्या हो अगर आपको भविष्य में दोबारा जीने का मौका मिले? जर्मनी की एक कंपनी इसी सपने को हकीकत में बदलने का दावा कर रही है.

बर्लिन की एक स्टार्टअप कंपनी है, जिसका नाम 'टुमॉरो बायो' (Tomorrow Bio) है. यह कंपनी एक अनोखी सर्विस दे रही है. वे लोगों के शरीर को उनकी कानूनी मौत के बाद बेहद ठंडे तापमान पर सुरक्षित रखते हैं, जिसे 'क्रायोप्रिजर्वेशन' (Cryopreservation) कहते हैं. इस सर्विस की कीमत $200,000 यानी लगभग ₹2 करोड़ है.

यह काम कैसे करता है?

कंपनी का मकसद शरीर को इस तरह से संरक्षित करना है कि भविष्य में जब मेडिकल साइंस बहुत तरक्की कर ले, तो इन लोगों को फिर से जिंदा किया जा सके.

इस प्रक्रिया में समय का बहुत महत्व होता है. इसीलिए कंपनी की एक इमरजेंसी टीम 24/7 तैयार रहती है. जैसे ही किसी क्लाइंट को कानूनी रूप से मृत घोषित किया जाता है, यह टीम तुरंत शरीर को ठंडा करने की प्रक्रिया शुरू कर देती है. कंपनी के को-फाउंडर का कहना है कि वे शरीर को 'फ्रीज' नहीं करते, क्योंकि इससे शरीर के अंदर बर्फ के क्रिस्टल बन सकते हैं जो कोशिकाओं को नष्ट कर देंगे. इसके बजाय, वे एक खास तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिससे शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए संरक्षित किया जा सके.

क्या लोग इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं?

आपको जानकर हैरानी होगी कि अब तक 650 से ज्यादा लोग इस सर्विस के लिए साइन-अप कर चुके हैं. ये सभी लोग इस उम्मीद पर पैसा लगा रहे हैं कि विज्ञान एक दिन मौत को हरा देगा. 'टुमॉरो बायो' यूरोप की पहली ऐसी लैब है और अब तक "तीन या चार" लोगों और पांच पालतू जानवरों को क्रायोप्रिजर्व कर चुकी है.

लेकिन, क्या यह सच में संभव है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तकनीक वाकई काम करती है. BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आज तक किसी भी इंसान को क्रायोप्रिजर्वेशन के बाद सफलतापूर्वक दोबारा जिंदा नहीं किया जा सका है.

कई वैज्ञानिक इस विचार को 'बेतूका' बताते हैं. लंदन के किंग्स कॉलेज के न्यूरोसाइंस के प्रोफेसर क्लाइव कोएन का कहना है, "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इंसानों जैसे जटिल दिमाग वाले जीवों को इस प्रक्रिया के बाद बिना गंभीर दिमागी नुकसान के वापस लाया जा सकता है." उनका मानना है कि यह सब सिर्फ झूठे वादे हैं.

फिलहाल, यह तकनीक विज्ञान से ज्यादा एक उम्मीद पर आधारित है. लोग एक ऐसे भविष्य पर दांव लगा रहे हैं जहां आज की कल्पना कल की हकीकत बन सकती है. यह एक महंगा सपना है, जिसकी सफलता की कोई गारंटी नहीं है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 02, 2025 10:37 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).