New AI Rules: भारत सरकार का बड़ा फैसला, सोशल मीडिया पर AI कंटेंट की पहचान होगी अनिवार्य; अश्लील डीपफेक पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए एआई निर्देश जारी किए हैं. अब एआई-जनरेटेड कंटेंट पर स्थायी 'लेबल' लगाना और यौन शोषण से जुड़ी एआई सामग्री को ब्लॉक करना अनिवार्य होगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली: भारत सरकार (Government of India) ने डिजिटल दुनिया में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं. मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को जारी इन आदेशों के तहत अब सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई-जनरेटेड या 'सिंथेटिक' (Synthetic) कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य कर दिया गया है. इन नियमों का मुख्य उद्देश्य असली और कंप्यूटर द्वारा बनाए गए कंटेंट के बीच के अंतर को स्पष्ट करना और डीपफेक के जरिए फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाना है. यह भी पढ़ें: डीपफेक पर सरकार का कड़ा प्रहार: Meta और YouTube को आदेश, 3 घंटे के भीतर हटाना होगा AI कंटेंट

स्थायी 'लेबल' और मेटाडेटा की अनिवार्यता

नए नियमों के मुताबिक, एआई की मदद से बनाए गए या बदले गए किसी भी वीडियो, फोटो या ऑडियो में एक स्थायी पहचानकर्ता (Identifier) और मेटाडेटा शामिल करना होगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक बार ये लेबल लग जाने के बाद, कोई भी प्लेटफॉर्म या यूजर इन्हें हटा या छिपा नहीं पाएगा. यह 'ट्रेसिबिलिटी' (निशानदेही) फीचर यूजर्स को रीयल-टाइम में यह समझने में मदद करेगा कि उनके सामने मौजूद जानकारी वास्तविक है या एआई द्वारा निर्मित.

एआई कंटेंट की स्वचालित निगरानी

सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गजों को अपने प्लेटफॉर्म पर उन्नत स्वचालित उपकरण (Automated Tools) तैनात करने का निर्देश दिया है। ये टूल्स विशेष रूप से उन एआई सामग्रियों का पता लगाने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए डिजाइन किए जाएंगे जो:

यह बदलाव प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी को 'कंटेंट अपलोड होने के बाद हटाने' (Reactive) से बदलकर 'अपलोड होने से रोकने' (Preventive) पर केंद्रित करता है.

मेटाडेटा की सुरक्षा और तकनीकी मजबूती

इन नियमों की एक बड़ी विशेषता मेटाडेटा की निरंतरता (Persistence) है. अक्सर यूजर्स एआई-लेबल वाले वीडियो डाउनलोड कर उसे दोबारा अपलोड करके पहचान मिटा देते थे. अब नई डिजिटल सिग्नेचर तकनीक यह सुनिश्चित करेगी कि कंटेंट जितनी बार भी साझा किया जाए, उसका 'एआई-जनरेटेड' स्टेटस फाइल के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी सुधार पहचान छिपाने वाले लूपहोल्स को बंद कर देगा. यह भी पढ़ें: Google की चेतावनी: 'Arsink' मैलवेयर ने दुनिया भर में 45,000 Android यूजर्स को बनाया शिकार; जानें डेटा सुरक्षित रखने के उपाय

यूजर्स के लिए त्रैमासिक चेतावनी और दंड

सोशल मीडिया कंपनियों को अब हर तीन महीने में कम से कम एक बार अपने यूजर्स को एआई के दुरुपयोग से जुड़े कानूनी परिणामों के बारे में चेतावनी देनी होगी. इन सूचनाओं में स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी, पहचान की चोरी (Impersonation) और डीपफेक बनाने पर होने वाली जेल और जुर्माने का जिक्र करना अनिवार्य है.

पृष्ठभूमि और सुरक्षा का लक्ष्य

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने यह कदम टेक स्टेकहोल्डर्स के साथ लंबी चर्चा के बाद उठाया है. हाल के वैश्विक आयोजनों के दौरान एआई के जरिए फैलाई गई भ्रामक सामग्रियों ने एक औपचारिक कानूनी ढांचे की आवश्यकता को अनिवार्य बना दिया था. सरकार का रुख स्पष्ट है कि एआई में नवाचार (Innovation) का स्वागत है, लेकिन सुरक्षा और भरोसे के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर आईटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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