डीपफेक पर सरकार का कड़ा प्रहार: Meta और YouTube को आदेश, 3 घंटे के भीतर हटाना होगा AI कंटेंट
भारत सरकार ने डीपफेक और एआई-जनरेटेड भ्रामक कंटेंट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नए आईटी नियम अधिसूचित किए हैं. अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कोर्ट या सरकार द्वारा फ्लैग किए गए कंटेंट को मात्र 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा.
नई दिल्ली: इंटरनेट पर एआई-आधारित डीपफेक (AI-Based Deepfakes) के बढ़ते खतरों को देखते हुए आईटी मंत्रालय (MeitY) ने मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) के लिए संशोधित गाइडलाइंस जारी की हैं. सरकार ने फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और यूट्यूब (YouTube) जैसे मध्यस्थों (Intermediaries) को निर्देश दिया है कि वे सभी एआई-जनरेटेड कंटेंट (AI-Generated Content) पर स्पष्ट रूप से 'लेबल' लगाएं. इन नए नियमों का उद्देश्य डिजिटल धोखाधड़ी, अश्लीलता और गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकना है. यह भी पढ़ें: Google की चेतावनी: 'Arsink' मैलवेयर ने दुनिया भर में 45,000 Android यूजर्स को बनाया शिकार; जानें डेटा सुरक्षित रखने के उपाय
3 घंटे की 'डेडलाइन' और सख्त कार्रवाई
नए नियमों के तहत, यदि सरकार या अदालत किसी एआई-जनरेटेड या डीपफेक कंटेंट को 'आपत्तिजनक' या 'अवैध' मानकर उसे हटाने का आदेश देती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा. यह समय सीमा पहले दी गई 36 घंटे की अवधि से बहुत कम है.
आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि एक बार AI लेबल या मेटाडेटा लग जाने के बाद, प्लेटफॉर्म्स उसे हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं दे सकते। सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध, यौन शोषण से संबंधित या भ्रामक एआई सामग्री का पता लगाने और उसे रोकने के लिए स्वचालित (Automated) टूल्स तैनात करने होंगे.
क्या है 'Synthetically Generated Information'?
सरकार ने पहली बार 'सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन' (SGI) को औपचारिक रूप से परिभाषित किया है. इसमें ऐसा कोई भी ऑडियो, वीडियो या विजुअल कंटेंट शामिल है जिसे एआई के जरिए बनाया या बदला गया हो और जो दिखने में वास्तविक लगे.
अपवाद: सामान्य संपादन (जैसे कलर करेक्शन, नॉइज़ रिडक्शन या ट्रांसलेशन) को इस दायरे से बाहर रखा गया है, बशर्ते वह मूल अर्थ को न बदले.
अनिवार्यता: बड़े प्लेटफॉर्म्स को अब यूजर्स से कंटेंट अपलोड करने से पहले यह घोषणा करानी होगी कि क्या वह एआई द्वारा बनाया गया है. यह भी पढ़ें: Elon Musk का बड़ा धमाका: Grok AI में आया नया ऑटोमेशन फीचर, अब खुद-ब-खुद शेड्यूल होंगे प्रॉम्प्ट्स और X सर्च; यहां देखें डिटेल्स
कानून और दंड का प्रावधान
आईटी मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई प्लेटफॉर्म या यूजर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, पॉक्सो (POCSO) एक्ट 2012 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 जैसे कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
कंपनियों को हर तीन महीने में अपने यूजर्स को सरल भाषा में इन नियमों और इनके उल्लंघन के परिणामों के बारे में सूचित करना होगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एआई का दुरुपयोग रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही अब और भी बढ़ गई है. यह नियम 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएंगे.