Google के Gemini पर बड़ा साइबर हमला: 1 लाख से अधिक प्रॉम्प्ट्स के जरिए AI को 'क्लोन' करने की कोशिश, कंपनी ने बताया 'बौद्धिक संपदा की चोरी'

गूगल ने खुलासा किया है कि उसके एआई चैटबॉट 'Gemini' पर बड़े पैमाने पर 'डिस्टिलेशन अटैक' किए जा रहे हैं. हमलावरों ने 1 लाख से ज्यादा सवालों (प्रॉम्प्ट्स) का इस्तेमाल कर जेमिनी के काम करने के तरीके और उसकी लॉजिक को चुराने की कोशिश की है, ताकि वे अपना खुद का एआई मॉडल बेहतर बना सकें.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली/कैलिफोर्निया: गूगल (Google) के फ्लैगशिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence) (AI) चैटबॉट 'Gemini' पर एक अभूतपूर्व डिजिटल हमला हुआ है. गूगल के अनुसार, ‘व्यावसायिक रूप से प्रेरित’ कुछ तत्वों ने जेमिनी को क्लोन (नकल) करने के लिए इसे बार-बार प्रॉम्प्ट किया. इस अभियान के तहत जेमिनी से 1,00,000 से अधिक सवाल पूछे गए, जिसका उद्देश्य इसकी आंतरिक कार्यप्रणाली और तर्क क्षमता (Reasoning) को समझना था. गूगल ने इसे 'डिस्टिलेशन अटैक' (Distillation Attacks) करार दिया है. यह भी पढ़ें: Google की चेतावनी: 'Arsink' मैलवेयर ने दुनिया भर में 45,000 Android यूजर्स को बनाया शिकार; जानें डेटा सुरक्षित रखने के उपाय

'डिस्टिलेशन अटैक' और 'मॉडल एक्सट्रैक्शन' क्या है?

गूगल ने गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये हमले 'मॉडल एक्सट्रैक्शन' की श्रेणी में आते हैं. इसमें हमलावर एआई सिस्टम से बार-बार ऐसे सवाल पूछते हैं जिससे चैटबॉट के भीतर छिपे पैटर्न और लॉजिक का पता चल सके.

कौन हैं इन हमलों के पीछे?

गूगल के थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप के मुख्य विश्लेषक जॉन हल्तक्विस्ट के अनुसार, ये अपराधी ज्यादातर निजी कंपनियां या शोधकर्ता हैं जो प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना चाहते हैं. हालांकि कंपनी ने किसी विशिष्ट नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन बताया गया कि ये हमले पूरी दुनिया से हो रहे हैं.

गूगल का मानना है कि जेमिनी जैसे बड़े मॉडल पर होने वाले ये हमले इस बात का संकेत हैं कि भविष्य में छोटी कंपनियों के कस्टम एआई टूल्स भी इसी तरह के खतरों का सामना करेंगे.

एआई की 'सोच' चुराने की कोशिश

गूगल ने बताया कि कई हमलों को विशेष रूप से उन एल्गोरिदम को समझने के लिए डिजाइन किया गया था जो जेमिनी को "तर्क" (Reasoning) करने में मदद करते हैं. हल्तक्विस्ट ने चेतावनी देते हुए कहा:

‘मान लीजिए कि आपके एआई मॉडल को आपके व्यापार करने के 100 साल के गुप्त अनुभवों पर प्रशिक्षित किया गया है. सैद्धांतिक रूप से, कोई हमलावर इन सवालों के जरिए उस पूरी बुद्धिमत्ता को 'डिस्टिल' यानी निचोड़ कर चुरा सकता है.’ यह भी पढ़ें: New AI Rules: भारत सरकार का बड़ा फैसला, सोशल मीडिया पर AI कंटेंट की पहचान होगी अनिवार्य; अश्लील डीपफेक पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध

एआई जगत में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी टेक कंपनी ने ऐसे आरोप लगाए हैं. पिछले साल, ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI ने भी अपने चीनी प्रतिद्वंद्वी 'DeepSeek' पर अपने मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इसी तरह के डिस्टिलेशन हमले करने का आरोप लगाया था. टेक दिग्गज कंपनियां इन मॉडल्स को विकसित करने पर अरबों डॉलर खर्च करती हैं, इसलिए इनकी आंतरिक कार्यप्रणाली को 'अत्यधिक मूल्यवान और गोपनीय' रखा जाता है.

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