Adobe के सीईओ शांतनु नारायण का इस्तीफा: AI के दौर में निवेशकों की चिंता के बीच पद छोड़ने का फैसला

एडोब के सीईओ शांतनु नारायण ने 18 वर्षों तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ने की घोषणा की है. यह फैसला एआई (AI) के बढ़ते प्रभाव और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच निवेशकों की चिंताओं को देखते हुए लिया गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: X)

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: सॉफ्टवेयर जगत की दिग्गज कंपनी एडोब (Adobe Inc.) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शांतनु नारायण (Shantanu Narayen) ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. 18 वर्षों तक कंपनी की कमान संभालने वाले नारायण का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) (AI) के दौर में कंपनी की भविष्य की विकास क्षमता को लेकर निवेशकों के मन में गहरे संदेह पैदा हो गए हैं. एडोब (Adobe) ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि 62 वर्षीय शांतनु नारायण तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक कि उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती. इसके बाद वह बोर्ड के अध्यक्ष (Chairman) के रूप में अपनी भूमिका जारी रखेंगे. यह भी पढ़ें: टेक जगत में छाई मायूसी: ‘Forever Layoffs’ और AI के बढ़ते चलन से कर्मचारियों का मनोबल न्यूनतम स्तर पर

निवेशकों की बढ़ती चिंता और गिरते शेयर

शांतनु नारायण के इस्तीफे की खबर के बाद एडोब के शेयरों में विस्तारित कारोबार (Extended Trading) में लगभग 7% की गिरावट दर्ज की गई. साल 2026 में अब तक कंपनी के शेयरों में करीब 23% की गिरावट आ चुकी है, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर है. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सीईओ के अचानक हटने से कंपनी की रणनीतिक निरंतरता, पूंजी आवंटन की प्राथमिकताओं और नवाचार (Innovation) की गति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

एआई स्टार्टअप्स से मिल रही कड़ी चुनौती

फोटोशॉप और इलस्ट्रेटर जैसे प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी एडोबी इस समय नई एआई कंपनियों और स्टार्टअप्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है. सेल्सफोर्स (Salesforce) और एटलेसियन (Atlassian) जैसी अन्य सॉफ्टवेयर कंपनियों की तरह एडोबी भी नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए संघर्ष कर रही है. हालांकि, एडोबी ने अपने रचनात्मक और मार्केटिंग सॉफ्टवेयर में एआई टूल्स को शामिल करने और कॉपीराइट जोखिमों से मुक्त 'जेनरेटिव एआई' मॉडल पेश करने की दिशा में काफी काम किया है, लेकिन निवेशकों को अभी भी कंपनी की बाजार हिस्सेदारी को लेकर चिंता है. यह भी पढ़ें: Atlassian Layoffs: एटलेसियन में बड़ी छंटनी, AI पर फोकस बढ़ाने के लिए 1,600 कर्मचारियों निकालने की तैयारी; भारत समेत दुनिया भर में असर

शांतनु नारायण का शानदार सफर

शांतनु नारायण को एडोब के इतिहास के सबसे सफल नेतृत्वकर्ताओं में गिना जाता है. साल 2007 के अंत में जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब से कंपनी का वार्षिक राजस्व लगभग छह गुना बढ़कर 24 बिलियन डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँच गया है. उनके कार्यकाल में कर्मचारियों की संख्या भी 7,000 से बढ़कर 30,000 से अधिक हो गई.

नारायण को सॉफ्टवेयर जगत में 'सब्सक्रिप्शन मॉडल' (Subscription Model) को सफलतापूर्वक लागू करने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने ग्राहकों को व्यक्तिगत एप्लिकेशन खरीदने के बजाय क्लाउड-आधारित मंथली सब्सक्रिप्शन लेने के लिए प्रेरित किया, जिसने एडोब की कमाई को स्थिर और दीर्घकालिक बना दिया.

आगे की राह: क्या होगा अगला कदम?

एडोब के लिए अगली चुनौती एक ऐसे नेतृत्व को खोजना है जो अनुशासित निष्पादन (Disciplined Execution) और आक्रामक एआई निवेश (Aggressive AI Investment) के बीच संतुलन बना सके. विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी नेतृत्व को न केवल मौजूदा ग्राहकों को बचाए रखना होगा, बल्कि एआई के तेजी से बदलते बाजार में अपनी तकनीकी बढ़त को भी साबित करना होगा.

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