What are SENA Countries in Cricket? क्रिकेट एक समय में सिर्फ क्षेत्रीय खेल था, लेकिन आज यह दुनियाभर के 103 देशों में खेला जाता है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अनुसार, इसमें 12 पूर्ण सदस्य और 96 एसोसिएट सदस्य देश शामिल हैं. बावजूद इसके, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में असली पकड़ कुछ गिने-चुने देशों की ही है, जो या तो भारतीय उपमहाद्वीप से आते हैं या फिर कुछ गैर-एशियाई शक्तिशाली राष्ट्रों से. इन गैर-एशियाई क्रिकेट शक्तियों को ही अक्सर SENA देशों के रूप में जाना जाता है. क्या भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट मैच के दौरान सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजली ने दी शुभमन गिल को स्टैंडिंग ओवेशन? जानिए विंबलडन 2024 की वायरल फोटो की सच्चाई
क्या हैं SENA देश?
SENA का अर्थ South Africa (दक्षिण अफ्रीका), England (इंग्लैंड), New Zealand (न्यूज़ीलैंड) और Australia (ऑस्ट्रेलिया) है. ये देश क्रिकेट की दुनिया में खास पहचान इसलिए रखते हैं क्योंकि यहां की पिचें, मौसम और खेलने की परिस्थितियाँ उपमहाद्वीप की तुलना में बिल्कुल भिन्न होती हैं.
- ऑस्ट्रेलिया में पिचें आमतौर पर तेज़ और बाउंसी होती हैं.
- इंग्लैंड की पिचें स्विंग के लिए जानी जाती हैं.
- न्यूज़ीलैंड में सीम मूवमेंट सबसे ज़्यादा देखने को मिलती है.
- दक्षिण अफ्रीका में तेज़ गति और ऊँची उछाल बल्लेबाज़ों के लिए चुनौती बनती है.
इसलिए एशियाई खिलाड़ियों की SENA देशों में प्रदर्शन को एक उपलब्धि और महानता का मानदंड माना जाता है. यही कारण है कि भारतीय उपमहाद्वीप के बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों का SENA देशों में किया गया प्रदर्शन, उनके करियर को एक अलग मुकाम देता है.
उपमहाद्वीप बनाम SENA: एक परंपरागत तुलना
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका की पिचें सूखी, धूलभरी और स्पिन फ्रेंडली होती हैं, जिससे इन देशों को "सबकॉंटिनेंट" की श्रेणी में रखा जाता है. इसके विपरीत, SENA देशों की परिस्थितियाँ तेज़ गेंदबाज़ों के लिए मुफीद मानी जाती हैं. ऐसे में SENA में अच्छा प्रदर्शन करना किसी भी बल्लेबाज़ या गेंदबाज़ के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, खासकर तब जब वे उपमहाद्वीप से आते हों.
क्यों है SENA में प्रदर्शन इतना खास?
क्रिकेट जगत में लंबे समय से यह धारणा रही है कि अगर कोई एशियाई खिलाड़ी SENA में शतक, पांच विकेट या मैच जिताऊ प्रदर्शन करता है, तो उसकी प्रतिभा को "ग्रेटनेस" के पैमाने पर मापा जाता है. हालांकि, यह दृष्टिकोण हमेशा दोतरफा नहीं होता, क्योंकि SENA देशों के खिलाड़ी जब उपमहाद्वीप में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उसे उसी स्तर की उपलब्धि नहीं माना जाता.
क्रिकेट अब भले ही वैश्विक खेल बन चुका हो, लेकिन SENA देशों की चुनौती आज भी सबसे कठिन मानी जाती है. और जब एक युवा भारतीय कप्तान शुभमन गिल वहां पर शतक नहीं, बल्कि दोहरा शतक लगाता है, तो यह सिर्फ एक पारी नहीं बल्कि एशियाई क्रिकेट के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय बन जाता है. गिल की यह पारी आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी कि अगर आपके पास तकनीक, धैर्य और आत्मविश्वास है, तो SENA की कठिन परिस्थितियों को भी मात दी जा सकती है.













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