How Pratika Rawal Get Winners' Medal? भारत ने महिला क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय लिखा जब टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका को फाइनल में हराकर विमेंस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब अपने नाम किया. यह भारत की महिलाओं का पहला आईसीसी खिताब था, जो 48 साल के लंबे इंतजार के बाद आया. इस ऐतिहासिक जीत में टीम की युवा ओपनर प्रतिका रावल ने अहम भूमिका निभाई, जिन्होंने टूर्नामेंट में कुल 308 रन बनाए और भारत की ओर से दूसरी सर्वाधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं. हालांकि, दुर्भाग्यवश सेमीफाइनल से पहले उन्हें चोट लग गई, जिसके कारण वे न तो सेमीफाइनल खेल सकीं और न ही फाइनल में टीम का हिस्सा बनीं. आईसीसी के नियमों के अनुसार, जो खिलाड़ी फाइनल स्क्वाड में शामिल नहीं होता, उसे विजेता पदक नहीं दिया जाता. इस वजह से प्रतिका को शुरू में वर्ल्ड कप विनर्स मेडल नहीं मिला. अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल ने रचा इतिहास, ऑस्ट्रेलिया में कंगारूओं के खिलाफ टी20I सीरीज़ में सबसे अधिक रन बनाने वाली बनी जोड़ी
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सभी भारतीय प्रशंसकों का दिल जीत लिया. आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने खुद इस मामले में दखल दिया. प्रतिका के पिता प्रदीप रावल ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि जय शाह ने व्यक्तिगत रूप से परिवार से संपर्क किया और भरोसा दिलाया कि उन्होंने आईसीसी से बात कर ली है, और प्रतिका को उनका मेडल जरूर मिलेगा.
प्रदीप रावल ने कहा, “जय शाह ने खुद हमें मैसेज किया और बताया कि उन्होंने आईसीसी से बात की है. उन्होंने कहा कि प्रतिका को उनका विनर्स मेडल मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले ही प्रतिका को उनका मेडल मिल गया. यह पूरी तरह जय शाह की पहल थी, उन्होंने खुद यह सुनिश्चित किया कि हमारी बेटी को उसका हक मिले.”
भारत की यह जीत केवल एक टूर्नामेंट जीत नहीं थी, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के आत्मविश्वास और संघर्ष की कहानी भी थी. साल 2005 और 2017 में दो बार फाइनल में हार झेलने के बाद यह टीम वर्ल्ड कप जीतने के लिए पूरी तरह तैयार थी. टूर्नामेंट के बीच भारत को दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से लगातार तीन हार झेलनी पड़ीं, जिससे उनका सेमीफाइनल में पहुंचना मुश्किल लग रहा था. लेकिन टीम ने हार नहीं मानी और जबरदस्त वापसी करते हुए न्यूजीलैंड को ‘वर्चुअल नॉकआउट’ में हराया, सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को मात दी और फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर इतिहास रच दिया. यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हुई. न केवल मैदान पर प्रदर्शन के लिए, बल्कि उस जज्बे के लिए जिसने 48 साल का इंतजार खत्म किया.













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