Madhav Gadgil Passes Away At 82: मशहूर इकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का लंबी बीमारी के बाद बुधवार देर रात पुणे में निधन हो गया. इस बात की जानकारी परिवार ने दी हैं. माधव गाडगिल 82 वर्ष के थे. माधव गाडगिल को व्यापक रूप से भारत के पर्यावरण आंदोलन के विवेक रक्षक के रूप में माना जाता था, जो संरक्षण के लिए नीचे से ऊपर, जन-केंद्रित दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए जाने जाते थे. साल 2011 की ऐतिहासिक माधव गाडगिल रिपोर्ट के लिए जाने जाने वाले, उन्होंने चेतावनी दी थी कि पश्चिमी घाट में अनियंत्रित बुनियादी ढांचे और खनन से पारिस्थितिक आपदाएँ उत्पन्न होंगी. उनके पैनल ने सिफारिश की कि नाजुक पर्वत श्रृंखला के 75% हिस्से को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील घोषित किया जाए, एक ऐसा प्रस्ताव जिसने राजनीतिक प्रतिरोध को जन्म दिया और आज भी काफी हद तक लागू नहीं किया गया है. साल 2024 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा गाडगिल को दुनिया के छह चैंपियंस ऑफ द अर्थ में से एक नामित किया गया था, जिसने उन्हें "लोगों का वैज्ञानिक" कहा था. माधव गाडगिल की चेतावनियाँ दुखद रूप से दूरदर्शितापूर्ण साबित हुईं, केरल के वायनाड में भूस्खलन से हजारों लोगों की जान चली गई.
माधव गाडगिल का पुणे में निधन:
Ecologist and academic Prof. Madhav Gadgil passes away at 83. @xpresskerala @NewIndianXpress pic.twitter.com/V06u2ywZ9Q
— Rajesh Abraham🇮🇳 (@pendown) January 8, 2026
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