अगर आप मानते हैं कि रोज़ाना किसी नज़दीकी विक्रेता से फलों का जूस पीने से सेहत अच्छी रहती है, तो हाल ही में वायरल हुआ एक वीडियो आपकी सोच बदल सकता है. इस घटना में लोगों ने एक ऐसे फल विक्रेता को पकड़ लिया जो असली फलों के बजाय पूरी तरह से केमिकल से बना जूस बेच रहा था. विक्रेता अचानक पकड़ा गया और उसे वही जूस पीने के लिए मजबूर होना पड़ा जो उसने अपने ग्राहकों को बेचा था. हालांकि उसने अनिच्छा से पूरा जूस गटक लिया, लेकिन उसमें मौजूद तत्वों की सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी थी, जिससे यह बात स्पष्ट हो गई कि आप क्या खा रहे हैं, इस बारे में सावधान रहना कितना ज़रूरी है. दिलचस्प बात यह है कि कई इंटरनेट यूजर्स ने उन बड़ी कंपनियों के प्रति ज़्यादा नाराज़गी जताई जो जाने-माने ब्रांड नामों के तहत ऐसे ही हानिकारक उत्पाद बेचती हैं. यह भी पढ़ें: इंदौर: जूस के पैकेट में चूहा मिलने का वीडियो वायरल, डिस्काउंट देख कर ऑनलाइन किया ऑर्डर
हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में विक्रेता को लोगों की भीड़ का सामना करते हुए दिखाया गया है, जो उसे पूरी तरह से केमिकल से बने मोसंबी जूस' बेचने के लिए फटकार लगा रहे हैं, जिसे वह बस 'मसाला' कह रहा है. लोगों ने पाया कि पानी में मिलाए गए रासायनिक पाउडर की गंध असली फलों के रस जैसी ही थी. जो लोग जूस की वास्तविक संरचना से अनजान हैं, उनके लिए मिलावट का पता लगाना मुश्किल हो सकता है.
फलों का रस बेचनेवाला यह वेंडर बिना फ्रूट्स के बेचता है रस
Street Food/Drink in India: Man is selling Mosambi Juice, but not a single slice of Mausambi used to make it; All Chemicals. Police & Municipality takes hafta ₹, Govt can't regulate 'em - so D!e hard. pic.twitter.com/GWgN6bMucD
— Mihir Jha (@MihirkJha) June 17, 2025
इस मामले ने एक बार फिर इस बात पर ज़ोर दिया कि आप जो खा रहे हैं और उसमें मौजूद सामग्री के बारे में सावधान रहना कितना ज़रूरी है. केमिकल युक्त जूस न सिर्फ़ ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकते हैं और एलर्जी का कारण बन सकते हैं, बल्कि लीवर और किडनी को भी लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकते हैं.
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, सोशल मीडिया यूजर्स ने एक छोटे फ्रूट जूस विक्रेता को निशाना बनाने के पाखंड को उजागर किया, जबकि बड़े औद्योगिक उत्पादक, जो जाने-माने ब्रांड नामों से समान उत्पाद बेचते हैं, बेदाग़ हैं. यह स्थिति खाद्य उद्योग में विश्वास और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाती है.













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