Tiruvannamalai Deepam 2023: दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण पर्व कार्तिगई दीपम! जब दीप-पूजा के साथ भाई-बहनों के स्नेहपूर्ण संबंधों को भी सेलिब्रेट करते हैं!

कार्तिगई दीपम (Karthigai Deepam) को तिरुवन्नामलाई दीपम (Tiruvannamalai Deepam) एवं कार्तिकाई दीपम के नाम से भी जाना जाता है. दक्षिण भारतीयों के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है. गौरतलब है कि तिरुवन्नमलाई अरुणाचलेश्वर स्वामी मंदिर में दस दिनों तक चलने वाला ‘कार्तिगई दीपम उत्सव’ यहां का सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय है, जिसे कार्तिकाई ब्रह्मोत्सवम् के नाम से भी जाना जाता है.

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Tiruvannamalai Deepam 2023 Date-Shubh Muhurat: कार्तिगई दीपम (Karthigai Deepam)  को तिरुवन्नामलाई दीपम एवं कार्तिकाई दीपम के नाम से भी जाना जाता है. दक्षिण भारतीयों के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है. गौरतलब है कि तिरुवन्नमलाई अरुणाचलेश्वर स्वामी मंदिर में दस दिनों तक चलने वाला ‘कार्तिगई दीपम उत्सव’ यहां का सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय है, जिसे कार्तिकाई ब्रह्मोत्सवम् के नाम से भी जाना जाता है.

कार्तिगाई दीपम एक लोकप्रिय एवं वार्षिक हिंदू पर्व है, जो मुख्य रूप से तमिल हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है. इस पर्व की तिथि तमिल सौर कैलेंडर के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जो आमतौर पर कार्तिकेय के महीने में आता है, जब रात्रि में कार्तिगाई नक्षत्र प्रबल होता है. इस वर्ष, कार्तिगाई दीपम रविवार, 26 नवंबर को मनाया जायेगा. कार्तिक दीपम, को रोशनी के पर्व के रूप में भी जाना जाता है. यह पर्व कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे कार्तिक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व उस दिन मनाया जाता है जब पूर्णिमा कार्तिक नक्षत्र के साथ मेल खाती है, हालांकि तमिल कैलेंडर में विषुव के सुधार के कारण एक अलग दिन पड़ता है. यहां हम कार्तिगाई दीपम 2023 की तिथि, शुभ मुहूर्त, और शुभ दिन के महात्म्य के बारे में बात करेंगे. यह भी पढ़ें : Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas 2023: गुरु तेग बहादुर ने शहादत दे दी, किंतु औरंगजेब के सामने सर नहीं झुकाया! जानें उनकी बहादुर की शौर्यगाथा!

कार्तिगाई दीपम् 2023 शुभ मुहूर्त

कार्तिगई नक्षत्रम् प्रारंभः 02.05 PM (26 नवंबर 2023, रविवार)

कार्तिगई नक्षत्रम् समाप्तः 02.05 PM (27 नवंबर 2023, सोमवार)

कार्तिगाई दीपम प्रदोषकाल की पूजा होने के कारण 26 नवंबर 2023, रविवार को मनाया जाएगा.

कार्तिगाई दीपम पूजा अनुष्ठान

कार्तिगई दीपम के दिन, इस पर्व को मनाने के लिए घरों में अगल विलाक्कस (मिट्टी के तेल के दीपक) कतारबद्ध शैली में जलाए जाते हैं. इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि यह बुरी शक्तियों को दूर रखता है, साथ ही सुख एवं समृद्धि लाता है. दक्षिण भारत में यह पर्व रक्षा बंधन की तरह भाइयों और बहनों के बीच के स्नेहपूर्ण बंधन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की समृद्धि और सफलता के लिए प्रार्थना करती हैं और दीप प्रज्वलित करती हैं. कार्तिकेय पूर्णिमा के इस अवसर पर, घर पर तैयार 365 बत्ती वाले तेल के दीपक शिव मंदिर में जलाए जाते हैं. कुछ घरों में, एक महीने तक निरंतर सूर्यास्त तक उपवास भी रखा जाता है.

कार्तिगई दीपम महत्व

कार्तिगाई दीपम को कार्तिकाई दीपम के नाम से भी जाना जाता है. यह भारत के दक्षिणी राज्यों के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण पर्व है. विशेष रूप से तिरुवन्नामलाई अरुणाचलेश्वर स्वामी मंदिर में कार्तिगई दीपम का उत्सव सर्वाधिक लोकप्रिय है, जिसे कार्तिकाई ब्रह्मोत्सवम् के नाम से भी जाना जाता है. यह 10 दिनों तक चलता है. इस उत्सव की शुरुआत ध्वजरोहणम से होती है, जब सूर्योदय के समय नक्षत्र उथिरादम प्रबल होता है. आमतौर पर नक्षत्र उथिरादम मुख्य कार्तिगाई दीपम दिवस से 10 दिन पहले प्रबल होता है.

शाम 6 बजे सूर्यास्त के बाद कार्तिगाई दीपम जलाया जाता है. भरणी दीपम से लौ यानि अग्नि लेकर शाम को, कार्तिगाई महा दीपम को रोशन करने के लिए पहाड़ी की चोटी पर ले जाया जाता है. केरल में इस त्योहार को त्रिकार्तिका के नाम से जाना जाता है, जो लक्ष्मी के एक रूप चोट्टानिकारा भगवती के सम्मान में मनाया जाता है. तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में इसे लक्षब्बा के नाम से मनाया जाता है.

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