Shab-e-Barat 2025: शब-ए-बारात 2025 की तारीख मुकर्रर हुई! जानें कब मनाया जायेगा यह पर्व, क्या है इसका महत्व एवं सेलिब्रेशन इत्यादि!

इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात का बहुत महत्व है. यह रात क्षमा की रात के रूप में मनाई जाती है. शब-ए-बारात की तिथि का निर्धारण चंद्रमा देखने के बाद किया जाता है,

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Shab-e-Barat 2025: इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात का बहुत महत्व है. यह रात क्षमा की रात के रूप में मनाई जाती है. शब-ए-बारात की तिथि का निर्धारण चंद्रमा देखने के बाद किया जाता है, हालांकि अधिकांश इस्लामिक त्योहारों की तिथियां चंद्रमा दिखने के बाद ही घोषित और सेलिब्रेट की जाती हैं. शब-ए-बारात कोई अपवाद नहीं है.

शब-ए-बारात भी कोई अपवाद नहीं है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बारात की तारीख आठवें माह शाबान के चंद्रमा को देखने के बाद निर्धारित की जाती है. परंपरा के अनुसार शब-ए-बारात हर साल शाबान की 15वीं रात को पड़ती है. आइये जानें इस वर्ष 2025 में पड़ने वाला शब-ए-बारात कब मनाया जायेगा और क्या है इसका महत्व एवं सेलिब्रेशन इत्यादि.ये भी पढ़े:Shab-e-Barat 2025 Mehndi Designs: शब- ए- बारात मनाने के लिए अपने हाथों में रचाएं ये फ्रंट हैंड और बैक हैंड मेहंदी डिजाइन- देखें वीडियो

इस तारीख को मनाई जाएगी शब-ए-बारात

शाबान चाँद दिखने की पुष्टि होने के पश्चात इस्लामिक कैलेंडर अनुसार, इस वर्ष शब-ए-बारात 13 फरवरी, 2025, गुरुवार, को मनाई जाएगी. विभिन्न धार्मिक संगठनों ने घोषणा की है कि 29वें रजब के पूरा होने के बाद, 30 जनवरी, 2025 को चाँद देखा गया. यद्यपि राजनपुर, भुजपाल और गुजरात सहित पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में, उस दिन चांद दिखाई नहीं दिया था. इसके बावजूद, अन्य क्षेत्रों में चांद देखे जाने की सूचना भेज दी गई थी. इसकी पुष्टि के बाद 31 जनवरी को शाबान का पहला दिन घोषित किया गया और इसके आधार पर 13 फरवरी की शाम को विशेष प्रार्थना के साथ शब-ए-बारात मनाई जाएगी.

इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात और धार्मिक अनुष्ठान का महत्व:

इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को एक पवित्र रात माना जाता है, इस रात मुस्लिम समुदाय के लोग प्रार्थना करते हैं, कुरान पढ़ते हैं और अपने पिछले पापों के लिए माफी मांगते हैं. इस रात इस्लाम धर्म के लोग पूरी रात जागते हैं. अल्लाह से प्रार्थना और मिन्नतें करते हैं. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात की गई प्रार्थनाओं का बहुत महत्व होता है, क्योंकि निष्ठा से मांगी गई दुआ कुबूल होती है, अल्लाह क्षमा प्रदान करते हैं.

शब-ए-बारात सेलिब्रेशन

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 14वीं तारीख को शब-ए-बारात का पर्व बड़े उत्साह एवं श्रद्धा के साथ  मनाया जाता है. इस रात को मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों से तौबा करते हैं. शब-ए-बारात को इबादत, रहमत, और मगफिरत की रात माना जाता है. इस रात मुस्लिम लोग नमाज़ और कुरान पढ़ते हैं. अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं. कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों की कब्र पर पुष्प चढ़ाते हैं और अगरबत्ती जलाते हैं, तथा दुआ करते हैं. घरों में मिठाइयां बनाई जाती हैं. बहुत से लोग पूरी रात अल्लाह से दुआ मांगते हैं.

 

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