Shab-e-Barat 2025 Wishes: इस वर्ष, शब-ए-बारात (Shab-e-Barat) 2025 शुक्रवार, 13 फरवरी, 2025 की रात को होने की उम्मीद है. हालांकि, सटीक तारीख शाबान, 1446 के चाँद के दिखने पर निर्भर है. शब-ए-बरात इस्लामी कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण रात है और इसे शाबान के मध्य (शाबान की 14वीं और 15वीं रात के बीच की रात) में मनाया जाता है. यही कारण है कि इसे निस्फ़ शाबान कहा जाता है. यह मुबारक रात शाबान की 14वीं रात को सूर्यास्त के समय शुरू होती है और शाबान की 15वीं रात को भोर में समाप्त होती है. अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने के अलग-अलग तरीके हैं और हर देश में इसका अलग-अलग नाम है. निस्फ़ शाबान को दक्षिण एशिया में शब-ए-बरात या शबे बारात के नाम से जाना जाता है, खासकर उपमहाद्वीप में, अरबी में लैलातुल बारात, इंडोनेशिया और मलेशिया में निस्फ़ु स्याबान (मालम निस्फ़ु स्याबान) और तुर्की में बेरात कंडिली के नाम से जाना जाता है.
शब-ए-बरात एक ऐसी रात है जिसे कई मुसलमान माफ़ी की रात के रूप में मानते हैं और पूरी रात अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह उन्हें अपनी बरकत दे. शाबान इस्लामी कैलेंडर का 8वाँ महीना है. यह बरकतों और अल्लाह से माफ़ी मांगने का महीना है. शब-ए-बारात की पूरी रात कुरान की तिलावत और खुदा की इबादत का दौर चलता है. इसके साथ ही एक-दूसरे को लोग शब-ए-बारात की मुबारकबाद भी देते हैं. आप भी इस पाक मौके पर अपने प्रियजनों को इन प्यारे वॉट्सऐप स्टेटस, जीआईएफ इमेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स, एचडी वॉलपेपर्स के जरिए शब-ए-बारात मुबारक (Shab-e-Barat Mubarak Wishes) कह सकते हैं.
1. अल्लाह, तूने मुझे यह सुंदर जीवन दिया है,
तूने ही ये मुबारक रात दी है,
तू ही मेरा आने वाला कल संवारेगा,
तेरी राजा में ही मुझे खुशियां मिलेंगी.
शब-ए-बारात मुबारक

2. रहमतों की आई है रात,
नमाजों का रखना साथ,
मनवा लेना रब से हर बात,
दुआ में रखना हमें भी याद,
शब-ए-बारात मुबारक

3.ऐ अल्लाह मैं तुझसे मांगता हूं ऐसी माफी
जिसके बाद कोई गुनाह न हो
ऐसी सेहत जिसके बाद बीमारी न हो
ऐसी रजा जिसके बाद कोई नाराजगी न हो
'शब-ए-बारात' मुबाकर हो

4. आज 'शब-ए-बारात' है खुदा की इबादत कर लेना
अगर मुझसे कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ कर देना
आज 'शब-ए-बारात' है खुदा की इबादत कर लेना

5. कबूलियत की आप पर बरसात हो...
खुशियों से आप की मुलाकात हो...
कोई अधूरी न रहे दुआ आपकी
ऐसी मुबारक ये शब-ए-बारात हो...

अलग-अलग देशों में इस रात को मनाने के अलग-अलग तरीके हैं. लोग अक्सर इस रात एक-दूसरे को मिठाइयां बांटते हैं. कुछ लोग आतिशबाजी के साथ भी रात का जश्न मनाते हैं, हालांकि यह स्थानीय परंपराओं के प्रभाव का परिणाम है और इसका कोई धार्मिक महत्व नहीं है और यहाँ तक कि कुछ विद्वानों ने इसे बिदह (धर्म में नवाचार) भी कहा है. इराक में, लोग अक्सर बच्चों को मिठाइयां बांटते हैं. दक्षिण एशियाई देशों में, लोग आमतौर पर पड़ोसियों, परिवार, दोस्तों और गरीबों और ज़रूरतमंदों को "हलवा" या अन्य व्यंजनों के रूप में जानी जाने वाली स्थानीय मिठाई बाँटते हैं. मध्य पूर्वी देश आमतौर पर रात का जश्न नहीं मनाते हैं.













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