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Som Pradosh Vrat: कार्तिक माह का अंतिम सोम प्रदोष व्रत 3 नवंबर को, इस चीज से करें महादेव का अभिषेक तो बरसेगा पैसा

हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. यह व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है.

Som Pradosh Vrat: कार्तिक माह का अंतिम सोम प्रदोष व्रत 3 नवंबर को, इस चीज से करें महादेव का अभिषेक तो बरसेगा पैसा

नई दिल्ली, 2 नवंबर : हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. यह व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग की विधिवत पूजा करता है, उस पर स्वयं महादेव प्रसन्न होते हैं और उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं.

त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव का प्रिय दिन माना गया है और जब यह तिथि सोमवार को पड़ती है तो इसका पुण्य फल और भी बढ़ जाता है. इस बार कार्तिक माह का अंतिम सोम प्रदोष व्रत 3 नवंबर को पड़ रहा है. यह व्रत हर दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है. वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 3 नवंबर की सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर होगा और इसका समापन 4 नवंबर को सुबह 2 बजकर 5 मिनट पर होगा. चूंकि प्रदोष व्रत में पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए व्रत और शिव पूजन 3 नवंबर को ही किया जाएगा. यह भी पढ़ें : Vaikuntha Chaturdashi 2025: भगवान शिव ने विष्णु जी की परीक्षा क्यों ली? जानें वैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत का महत्व, मुहूर्त, पूजा-विधि एवं व्रत कथा!

इस दिन प्रदोष काल का समय शाम 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. यही समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना गया है. इस दौरान पूजा-अर्चना करने से भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है और उनके जीवन से सभी प्रकार के भय, रोग और कष्ट दूर होते हैं. ज्योतिष के अनुसार, इस बार के सोम प्रदोष व्रत पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस दिन को और अधिक खास बना रहे हैं. इस तिथि पर रवि योग, शिववास योग और हर्षण योग का संयोग बन रहा है. रवि योग दोपहर 3 बजकर 5 मिनट से प्रारंभ होगा और अगले दिन सुबह तक रहेगा. इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से आरोग्यता और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

वहीं, शिववास योग का निर्माण देर रात 2 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जब महादेव नंदी की सवारी करेंगे. इस योग में शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही हर्षण योग प्रदोष काल तक सक्रिय रहेगा. ज्योतिषियों के अनुसार, इस योग में भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में खुशहाली आती है. सोम प्रदोष व्रत को केवल भगवान शिव की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का दिन भी कहा गया है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. दिनभर व्रत या फलाहार करें और शाम को पुनः स्नान कर पूजा स्थल को शुद्ध करें.

प्रदोष काल में शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाएं और गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी व गन्ने के रस से अभिषेक करें. भगवान शिव को चंदन, धतूरा, बेलपत्र, शमी पत्र और भस्म अर्पित करें. इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करें और श्रद्धा से शिव तांडव स्तोत्र या शिव चालीसा का पाठ करें. पूजा के अंत में आरती करें और सभी को प्रसाद बांटें.

इस व्रत के दिन कुछ विशेष उपाय भी अत्यंत फलदायी माने गए हैं. अगर कोई व्यक्ति इस दिन गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करता है तो उसे धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है. बेलपत्र पर 'ॐ' लिखकर चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है और शमी के फूल अर्पित करने से कार्य सिद्धि होती है. चांदी का नाग या त्रिशूल मंदिर में चढ़ाने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 02, 2025 11:49 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).