World's Rarest New Blood Group: वैज्ञानिकों ने की दुनिया के सबसे दुर्लभ नए ब्लड ग्रुप की पहचान, जानें इसके बारे में
फ्रांस की रक्त आपूर्ति एजेंसी ने घोषणा की है कि कैरेबियाई द्वीप ग्वाडेलोप की एक फ्रांसीसी महिला को एक नए ब्लड ग्रुप की एकमात्र ज्ञात वाहक के रूप में पहचाना गया है, जिसे "ग्वादा नेगेटिव" कहा जाता है.
World's Rarest New Blood Group: फ्रांस (France) की रक्त आपूर्ति एजेंसी ने घोषणा की है कि कैरेबियाई द्वीप ग्वाडेलोप (Caribbean island of Guadeloupe) की एक फ्रांसीसी महिला को एक नए ब्लड ग्रुप (New Blood Group) की एकमात्र ज्ञात वाहक के रूप में पहचाना गया है, जिसे 'ग्वादा नेगेटिव' कहा जाता है. फ्रांसीसी रक्त प्रतिष्ठान (French Blood Establishment) यानी ईएफएस (EFS) ने शुक्रवार को कहा कि यह घोषणा शोधकर्ताओं द्वारा सर्जरी से पहले नियमित परीक्षण से गुजरने वाले एक मरीज से रक्त का नमूना प्राप्त करने के 15 साल बाद की गई थी. एजेंसी ने सोशल नेटवर्क लिंक्डइन पर एक बयान में कहा कि EFS ने अभी-अभी दुनिया में 48वें रक्त समूह की खोज की है. इस खोज पर आधिकारिक तौर पर जून की शुरुआत में मिलान में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (International Society of Blood Transfusion) यानी ISBT द्वारा मान्यता दी गई थी.
वैज्ञानिक संघ ने अब तक 47 रक्त समूह प्रणालियों को मान्यता दी थी. खोज में शामिल ईएफएस के एक चिकित्सा जीवविज्ञानी थिएरी पेयर्ड ने एएफपी को बताया कि 2011 में पहली बार रोगी में एक ‘बहुत ही असामान्य’ एंटीबॉडी पाई गई थी. उन्होंने कहा कि उस समय संसाधनों ने आगे के शोध की अनुमति नहीं दी. पेयर्ड ने कहा कि वैज्ञानिक अंततः 2019 में ‘उच्च-थ्रूपुट डीएनए अनुक्रमण’ की बदौलत रहस्य को सुलझाने में सक्षम थे, जिसने एक आनुवंशिक उत्परिवर्तन को उजागर किया. यह भी पढ़ें: Sickle Cell Anemia: जानें क्या है सिकल सेल एनीमिया, कैसे करें बचाव
पेयर्ड ने कहा कि मरीज, जो उस समय 54 वर्ष का था और पेरिस में रहता था, सर्जरी से पहले नियमित परीक्षण करवा रहा था, जब अज्ञात एंटीबॉडी का पता चला. विशेषज्ञ ने कहा कि यह महिला ‘निस्संदेह दुनिया में एकमात्र ज्ञात मामला है.’ उन्होंने कहा कि वह दुनिया की एकमात्र ऐसी व्यक्ति है जो खुद के साथ संगत है. पेयर्ड ने कहा कि महिला को यह रक्त प्रकार उसके पिता और माता से विरासत में मिला है, जिनमें से प्रत्येक में उत्परिवर्तित जीन था.
पेयर्ड ने कहा कि विशेषज्ञों के बीच ‘ग्वादा नेगेटिव’ नाम लोकप्रिय रहा है, जो रोगी की उत्पत्ति को संदर्भित करता है और ‘सभी भाषाओं में अच्छा लगता है.’ ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज सबसे पहले 1900 के दशक की शुरुआत में हुई थी. DNA अनुक्रमण की बदौलत हाल के वर्षों में नए रक्त समूहों की खोज में तेजी आई है. पेयर्ड और उनके सहकर्मी अब उसी रक्त समूह वाले अन्य लोगों को खोजने की उम्मीद कर रहे हैं. EFS ने कहा कि नए रक्त समूहों की खोज का मतलब है दुर्लभ रक्त प्रकारों वाले रोगियों को बेहतर स्तर की देखभाल प्रदान करना.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 26, 2025 11:43 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

