पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) सूर्य को अर्घ्य देने से लेकर ब्राह्मणों को अन्न दान तक में काले तिल का बहुतायत इस्तेमाल किया जाता है. विद्वान पुरोहितों का मानना है कि में काला तिल जिसे कृष्ण तिल भी कहा जाता है का श्राद्ध पखवाड़े में बहुतायत इस्तेमाल इसलिए होता है, क्योंकि यह पितरों को तृप्त करता है, पाप का नाश करता है, यमराज से संबद्ध है साथ ही आध्यात्मिक वातावरण को शुद्ध करता है, यही वजह है कि काला तिल केवल श्राद्ध में ही नहीं बल्कि पूजा के हवन और नवग्रहों में भी शामिल होता है. आइये जानते हैं काला तिल के बारे में विस्तार से..
धार्मिक कारण
पितरों की तृप्ति: गरुड़ पुराण, विष्णु धर्मसूत्र और अन्य ग्रंथों में कहा गया है कि काले तिल पवित्र और पितृ प्रिय होते हैं. काले तिलों का उपयोग पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए किया जाता है. जल में काला तिल डालकर तर्पण करते समय कहा जाता है निम्न मंत्र पढ़ा जाता है. यह भी पढ़ें : Pitru Paksha Special: त्र्यंबकेश्वर में पितृ दोष और सर्प दोष से मुक्ति के लिए होता है विशेष अनुष्ठान, तीन दिन तक चलती है पूजा
‘तिलैस्तर्पयामि’
अर्थात तिलों द्वारा पितरों का तर्पण करता हूं
तिलों के माध्यम से पितरों को जल दान देने से उन्हें शांति मिलती है और वे प्रसन्न होते हैं.
अशुद्धियों का नाशः तिल को शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि काले तिल के प्रयोग से नकारात्मक ऊर्जा, पाप, और अशुभ प्रभाव दूर होते हैं. श्राद्ध कर्म में जहां वातावरण शुद्ध और सात्विक होना चाहिए, वहां काले तिल की यह शक्ति सहायक मानी जाती है.
यम और मृत्यु से जुड़ावः कुछ पौराणिक ग्रंथों में काले तिल का संबंध यमराज से भी बताया गया है, जो मृतात्माओं के अधिपति हैं. श्राद्ध पक्ष में हम दिवंगत पितरों का स्मरण करते हैं, इसलिए काले तिल का प्रयोग उन्हें यमलोक में तृप्ति और शांति प्रदान करने हेतु किया जाता है.
कर्मकांड और रक्षात्मक उपयोगः अकसर पिंडदान और तर्पण में ही नहीं बल्कि पूजा के पश्चात हवन अथवा यज्ञ में भी काले तिल का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि यह अपवित्र शक्तियों से रक्षा करता है.
हवन सामग्री में काले तिल डालने से वातावरण शुद्ध होता है और राक्षसी शक्तियों का नाश होता है.
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: आयुर्वेद के अनुसार, काला तिल ऊर्जा, बल, पाचन शक्ति और मन की स्थिरता देने वाला होता है. इस समय किया गया भोजन व यज्ञ में तिलों का प्रयोग शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है.
पितृ पक्ष में काले तिल का प्रमुख उपयोग कहां-कहां होता है?
कार्य उपयोग
तर्पण जल में काले तिल डालकर पितरों को अर्घ्य देने का नियम है
पिंडदान चावल, जौ और काले तिल के मिश्रण से पिंड बनाया जाता है और पितरों को दान करते हैं
हवन/यज्ञ हविष्य में काला तिल मिलाकर देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है
भोजन में बहुत सी जगहों पर काले तिल का लड्डू आदि बनाकर पितरों को अर्पित किया जाता है.













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