National Consumer Rights Day 2023: क्या हैं उपभोक्ता के अधिकार? जानें इस दिवस के इतिहास एवं महत्व आदि के बारे में आवश्यक तथ्य!
National Consumer Rights Day 2023

दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिवसों में एक है राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस, क्योंकि खरीद और बिक्री के अधिकांश निर्णय उपभोक्ताओं द्वारा किए जाते हैं. पश्चिमी देशों में उपभोक्ता अधिकारों को उचित सम्मान के साथ बनाया गया है, जबकि भारत अभी भी अपने राष्ट्रीय उपभोक्ता आंदोलन को बढ़ावा देने और इसके लिए समर्थन दिखाने की दिशा में काम कर रहा है. उपभोक्ताओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए देश में प्रत्येक वर्ष 23 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है. जबकि विश्व स्तर पर यह दिवस 15 मार्च को मनाया जाता है. यहां हम जानेंगे देश में उपभोक्ताओं के अधिकारों, महत्व और राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के इतिहास आदि के बारे में, जिसकी जानकारी होना हर नागरिक का अधिकार है.

राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस का महत्व

हम अक्सर किसी न किसी कंपनी की सेवा अथवा प्रलोभन वाले विज्ञापनों के झांसे में आ जाते हैं, और किसी विवाद आदि से बचने के लिए उसे नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि हमें क्षतिग्रस्त, अथवा गैर मांग की हुई उत्पादों को वापस कर देना चाहिए. हमारी यह प्रवृत्ति एक नई जागरूकता पैदा करेगी और आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक डर पैदा करेगा ताकि वे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद ही बनाने का प्रयास करें. यह भी पढ़ें : New Year’s Day 2024: ‘आयुष्मान’ और ‘गजकेसरी’ सहित अन्य योग एवं नक्षत्रों में होगी नववर्ष की शुरुआत! जानें ये नक्षत्र एवं योग नये साल के लिए कितने शुभ साबित होंगे!

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं के अधिकार

साल 1986 में देश में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विधेयक को पास किया गया था. इसके बाद इसमें साल 1991, 1993 और 2003 में कई बदलाव किए गए. राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के खास मौके पर आइये जानें उपभोक्ता के विशेष अधिकारों के बारे में.

* राइट टू सेफ्टी किसी भी ग्राहक को मिलने वाला पहला अधिकार है. कोई दुकानदार ग्राहकों को कोई भी खराब सामान नहीं बेच सकता है. सामान बेचते समय उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखना जरूरी है.

* राइट टू इन्फॉर्मेशन के दूसरे अधिकार के तहत ग्राहकों को हक है कि वह जानें कि प्रोडक्ट की क्वालिटी और क्वांटिटी क्या है. इसके साथ-साथ प्रोडक्ट के दाम के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार ग्राहक के पास है.

* राइट टू चूज के जरिये ग्राहक किसी भी उत्पाद, कंपनी या सर्विस को अपनी जरूरत और इच्छा के अनुसार चुन अथवा रद्द कर सकता है.

* राइट टू हर्ड के जरिये ग्राहक किसी भी तरह का अन्याय होने की स्थिति में अपनी शिकायत कंज्यूमर कोर्ट में कर सकता है. कोर्ट ग्राहक की पूरी बात सुनकर अपना फैसला सुना सकता है.

* राइट टू रिड्रेसल के जरिये उपभोक्ता खराब प्रोडक्ट मिलने पर दूसरे अच्छे प्रोडक्ट की मांग कंपनी या दुकानदार से कर सकता है. ऐसी सुविधा नहीं मिलने पर वह कंज्यूमर कोर्ट भी जा सकता है.

* राइट टू कंज्यूमर राइट्स एजुकेशन के जरिये ग्राहकों को अपने सभी अधिकार जानने का हक है. इसके जरिये किसी तरह के फ्रॉड की स्थिति में व्यक्ति अपनी शिकायत कर सकता है.

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय उपभोक्ता सुरक्षा दिवस का गठन साल 1986 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत किया गया था. यह दिन उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा करने और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए बनाया गया था. यह फैसला उन निर्णयों में से एक है जो सरकार ने बाजार के शोषण को नियंत्रित करने के लिए लिया था. क्योंकि एक अच्छा विक्रेता जहां ग्राहकों की प्रसन्नता को सर्वोपरि मानता है, वहीं कुछ सेल्समैन अपना लाभ कमाने के लिए उपभोक्ता के अधिकारों का गलत प्रयोग करता है. दरअसल उपभोक्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित रखना आसान नहीं है, क्योंकि अकसर एक नया घोटाला और इसका फायदा उठाने की नई तकनीकों का खुलासा होता रहता है. इसलिए इस दिशा में हमेशा जागरूक रहना चाहिए.