International Epilepsy Day 2025: मिर्गी क्या है? अंतर्राष्ट्रीय मिर्गीदिवस पर जानें इसका इतिहास, लक्षण, कारण एवं इससे बचने के कुछ उपाय!

  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मिर्गी मस्तिष्क संबंधित पुरानी और गैर संचारी बीमारी हैजो मरीज को कहीं और कभी भी परेशान कर सकता है. अचानक दौरा पड़ने पर मरीज के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकता है. इसकी घातकता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा फरवरी के दूसरे सोमवार को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है. इसका मुख्य मकसद मिर्गी से पीड़ित मरीजों को लोगों से अपने अनुभव साझा तथा आम लोगों को इस बारे अधिक से अधिक जानकार बनाने की कोशिश की जाती है. इस वर्ष 10 फरवरी 2025 को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जायेगा. यहां हम बात करेंगे इस घातक बीमारी के लक्षणों, बचने के उपायों तथा इससे जुड़े कुछ जरूरी फैक्ट्स के बारे में...

अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस का इतिहास

  अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस की शुरुआत दो संगठनों ( इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी (ILAE) और इंटरनेशनल ब्यूरो फॉर एपिलेप्सी (IBE)) के संयुक्त सुझाव से साल 2015 को फरवरी माह के दूसरे सोमवार से हुई थी. इसके शुरुआत से ही लोगों को स्थितियों और इसके प्रभावों के बारे में मार्गदर्शन करने के लिए विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. आज दुनिया भर के 120 से अधिक देशों में इस दिन अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है यह भी पढ़ें : Jaya Ekadashi 2025: जया एकादशी पर इन उपायों से मिल सकती है भूत-प्रेत जैसी नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति जानें इसका महत्व, मुहूर्त एवं पूजा विधि इत्यादि!

मिर्गी क्या है?

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति हैजिसमें मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधियों के कारण तेज दौरे (seizures) पड़ते हैं. इससे पीड़ित व्यक्ति की चेतना तक प्रभावित हो सकती है, शरीर में अकड़न आ सकती है, कुछ पल के लिए पीड़ित असहाय, असमर्थ होकर बेहोश हो सकता है. ये दौरे अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं. यात्रा के दौरान मिर्गी के दौरे पीड़ित व्यक्ति के लिए घातक भी साबित हो सकते हैं.  

मिर्गी के कारण

आनुवंशिक कुछ मामलों में यह आनुवंशिक अर्थात माता-पिता के जींस से आ सकते हैं.

दवाओं का दुष्प्रभाव: कुछ दवाइयों के सेवन के कारण हुए साइड इफेक्ट्स भी मिर्गी का कारण हो सकता है.

मस्तिष्क की चोटः मस्तिष्क में किसी तरह की चोट, मसलन दुर्घटना, किसी दीवार आदि से टकराने या किसी अन्य वजह से सिर में चोट लगने से भी मिर्गी हो सकती है.

स्ट्रोकः स्ट्रोक या मस्तिष्क से किसी कारण से हुआ रक्तस्राव.

नशीली दवाएंः कभी-कभी नशीली दवाओं, शराब अथवा अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से भी मिर्गी हो सकती है.

मस्तिष्क में संक्रमण मस्तिष्क में सूजनजैसे मैनिंजाइटिस, एन्सेफलाइटिस, या मस्तिष्क फोड़ा अथवा मस्तिष्क संबंधित विकृतियां या ट्यूमर भी एक कारण हो सकता है.

मिर्गी के लक्षण

अचानक तेज झटके के साथ शरीर में ऐंठन शुरू होना

आंखें पलटने लगना

मुंह से झाग का निकलना

शरीर में अकड़न के साथ चेतना का खोना

मूत्र विसर्जन पर नियंत्रण खोना

ये लक्षण दो से तीन मिनट तक रहते हैं.

मिर्गी से बचने के कुछ उपाय 

* मेडिकल अलर्ट ब्रेसलेट पहनें.

* दौरे आने की किसी भी संभावना वाले ट्रिगर से बचें.

* न्यूनतम सात से आठ घंटे की नींद लें.

* स्वस्थ रहें और तनाव का प्रबंधन करें.

* दौरा अवरोधी दवाएं लें और खुराक को नियमित रूप से लें.

* दवाओं के साइड इफ़ेक्ट होने पर डॉक्टर से तत्काल सलाह लें.

* मेडिकल अलर्ट ब्रेसलेट पहनें.

* विटामिन बी 6 और विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर के सुझाव के अनुसार भोजन करें.