Hola Mohalla 2025: कब और क्यों मनाया जाता है ‘होला मोहल्ला’? जानें इस तीन दिवसीय पर्व के बारे में आवश्यक जानकारियां!

होला मोहल्ला सिख समुदाय का बेहद महत्वपूर्ण पर्व है. सिख समुदाय इस पर्व को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है. यह पर्व इतना भव्य होता है कि इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आनंदपुर साहिब आते हैं. तीन दिवसीय यह त्योहार सिख धर्म के लिए धार्मिक एवं सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होता है. इस पर्व के जरिए एकता और वीरता का संदेश दिया जाता है.

कैसे हुई इस पर्व की शुरुआत?

इस पर्व को मनाने के पीछे गुरु गोबिंद सिंह जी का मकसद था एक ऐसे समुदाय का निर्माण हो, जो न केवल योग्य और बहादुर योद्धा हो, बल्कि, आत्म-अनुशासन और आध्यात्मिकता में पारंगत हो. इस पर्व का उद्देश्य एकता, बंधुत्व, वीरता और पारस्परिक प्रेम का प्रसार करता है. इसलिए सिख समुदाय के लिए यह पर्व धार्मिक नजरियों से काफी महत्वपूर्ण होता है और दुनियाभर में सिख समुदाय इस त्योहार को हर्षोल्लास से मनाते हैं. यह भी पढ़ें : International Women’s Day 2025 Messages: हैप्पी इंटरनेशनल विमेंस डे! इन हिंदी WhatsApp Wishes, Quotes, Facebook Greetings के जरिए व्यक्त करें महिलाओं के प्रति सम्मान

कब मनाया जाएगा होला मोहल्ला पर्व!

17 वीं शताब्दी के अंत में सिख धर्म के दसवें गुरू गुरू गोबिंद सिंह द्वारा स्थापित, ‘होला मोहल्ला’ का आयोजन सिख समुदाय के आपसी सौहार्द और शक्ति प्रदर्शन के लिए किया जाता है. क्योंकि उन दिनों मुगलों के आक्रमण का सामना करने के लिए सैनिकों को सदा तैयार रहना होता था. उसी परंपरा के अनुसार आज भी सिख समुदाय नकली युद्ध एवं अभ्यास कर अपने सैन्य कौशल का प्रदर्शन करते हैं. इस वर्ष होला मोहल्ला 14 मार्च से 16 मार्च, 2025 तक मनाया जाएगा. होला-मोहल्ला के आयोजन का मुख्य उद्देश्य युद्ध में सिख पुरुषों की शक्ति प्रदर्शन कर समुदाय में साझा भावना को शेयर करना, साथ ही नकली युद्ध करके यह देखना होता है कि शारीरिक शक्ति के मामले में सिख समुदाय कितना तैयार हैं..

होला मोहल्ला का तीन दिवसीय आयोजन

होला-मोहल्ला पर्व की शुरुआत विभिन्न गुरुद्वारों में प्रार्थना, कीर्तन, भजन एवं प्रभात-फेरी आदि से होती है. आनंदपुर में विशेष रूप से नगर-कीर्तन जुलूस निकाले जाते हैं. इस पर्व में शामिल होने के लिए देश दुनिया भर से सिख समुदाय यहां आते हैं. होला मोहल्ला के अगले दिन मार्शल आर्ट का आयोजन किया जाता है. यह पारंपरिक मार्शल आर्ट दिन के मुख्य आकर्षणों में एक है. इसमें नकली युद्ध का आयोजन किया जाता है. इसके अतिरिक्त कुश्ती, तीरंदाजी आदि की भी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं. इस दिन सिख समुदाय पारंपरिक वस्त्र पहनकर इस पर्व का हिस्सा बनते हैं.

पर्व के तीसरे एवं अंतिम दिन सिख समुदाय देश और समुदाय के लिए लड़ने वाले और अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी जाती है. इसके बाद गुरुद्वारा में लंगर का आयोजन किया जाता है, जिसमें हर समुदाय एवं वर्ग के लोग शामिल होते हैं.