महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग क्यों? सामान्य लगने वाले इन संकेतो को न करें नजरअंदाज
जहां पुरुषों में हार्ट अटैक के क्लासिक लक्षण (Heart Attack Symptoms) जैसे सीने में तेज दर्द, सांस फूलना और बाएं हाथ में दर्द आम हैं, वहीं महिलाओं में यह लक्षण अक्सर बेहद सूक्ष्म यानी सामान्य से लगने वाले दिखते हैं.
कभी हार्ट अटैक (Heart Attack) को बुजुर्ग पुरुषों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह हर उम्र और हर जेंडर में तेजी से बढ़ रहा है. खासतौर पर महिलाओं में इसके मामलों में इजाफा चिंता का विषय है. गलत जीवनशैली, असंतुलित खानपान, तनाव, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं. जहां पुरुषों में हार्ट अटैक के क्लासिक लक्षण (Heart Attack Symptoms) जैसे सीने में तेज दर्द, सांस फूलना और बाएं हाथ में दर्द आम हैं, वहीं महिलाओं में यह लक्षण अक्सर बेहद सूक्ष्म यानी सामान्य से लगने वाले दिखते हैं. यही वजह है कि कई बार इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है और इलाज देर से शुरू होता है.
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महिलाओं में दिखने वाले लक्षण
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नवीन भामरी के अनुसार महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण कम दिखते हैं. कुछ संकेत इस प्रकार हैं:
असामान्य थकान: हल्के काम के बाद भी अत्यधिक थकान या कई दिनों तक लगातार कमजोरी.
सांस फूलना या चक्कर आना: बिना मेहनत किए भी सांस फूलना, हल्का सिर घूमना या चक्कर आना.
छाती में असहज महसूस होना: दबाव, कसाव या भारीपन, जो अक्सर पुरुषों की तुलना में कम तीव्र होता है.
जबड़े, गर्दन, पीठ या कंधे में दर्द: यह दर्द मांसपेशियों के खिंचाव जैसा लगता है और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं.
पाचन संबंधी समस्या: मतली, उल्टी, अपच या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द.
ठंडा पसीना और बेचैनी: कई बार इसे तनाव या एंग्ज़ायटी मानकर टाल दिया जाता है.
नींद में गड़बड़ी: नींद टूटना, सोने में दिक्कत या पूरी नींद के बाद भी थकान बने रहना.
साइलेंट हार्ट अटैक: कुछ महिलाओं में बिल्कुल हल्के या न के बराबर लक्षण दिखते हैं, जिन्हें सामान्य थकान या अपच समझ लिया जाता है.
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महिलाओं के लक्षण क्यों समझे नहीं जाते?
हार्ट डिजीज महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण है, लेकिन इसके संकेतों के बारे में जागरूकता कम है. साथ ही, महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, माइक्रोवैस्कुलर डिसफंक्शन (CMD), या स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन (SCAD) जैसी स्थितियां अलग तरह के लक्षण पैदा करती हैं. यही वजह है कि कई बार सामान्य टेस्ट में भी समस्या पकड़ में नहीं आती.
महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाले कारण
- परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास
- माइक्रोवैस्कुलर डिजीज या तनाव से जुड़ी हार्ट समस्या
- गर्भावस्था से जुड़ी बीमारियां (जैसे प्रीक्लेम्पसिया, गर्भकालीन डायबिटीज़)
- मोटापा और हाई बीपी
- एनीमिया या अन्य स्त्री रोग
हार्ट अटैक से बचाव के उपाय
- संतुलित आहार अपनाएं- फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले प्रोटीन लें, नमक और सैचुरेटेड फैट कम करें.
- नियमित व्यायाम करें- हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम ज़रूरी है.
- तनाव नियंत्रित करें- योग, ध्यान और गहरी साँसें मददगार हैं.
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं- ये दिल के लिए सबसे बड़े दुश्मन हैं.
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं- ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच करें.
- परिवार के इतिहास पर ध्यान दें- यदि परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है तो ज्यादा सतर्क रहें.
महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर छुपे हुए और अलग तरह के होते हैं. यही कारण है कि इन्हें समझना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है. सही जीवनशैली, नियमित जांच और जागरूकता के जरिए महिलाएं न सिर्फ हार्ट अटैक के खतरे को कम कर सकती हैं बल्कि अपने दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती हैं.