Dev Diwali 2020 Mehndi Designs: हाथों में मेहंदी रचाकर मनाएं देव दीपावली का पावन पर्व, देखें लेटेस्ट और खूबसूरत डिजाइन्स
देव दीपावली पर बात महिलाओं की करें तो वो बड़ी आस्था और विश्वास के साथ इस पर्व को मनाती हैं. आमतौर पर महिलाएं किसी भी उत्सव खास बनाने और पर्व की शुभता बढ़ाने के लिए अपने हाथों में मेहंदी रचाती हैं. इसी कड़ी में देव दीपावली के अति शुभ अवसर पर हम आपके लिए लेटेस्ट और खूबसूरत मेहंदी डिजाइन्स, जिन्हें आप अपने हाथों पर अप्लाई करके, उसकी खूबसूरती को बढ़ा सकती हैं.
Dev Diwali 2020 Mehndi Designs: देव दीपावली (Dev Deepawali) का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. दिवाली (Diwali) की ही तरह इसकी भी तैयारी की जाती है. देव दीपावली पर इस बार भगवान शिव की नगरी काशी (Kashi) में 15 लाख दीये जलाने की तैयारी की गई है.अयोध्या दीपोत्सव (Ayodhya Depotsav) के बाद काशी का ये अगला भव्य उत्सव होगा. पिछले साल देव दीपावली पर 10 लाख दीयों से काशी के सभी घाटों को रोशन किया गया था. इस साल देव दीपावली 29 नवंबर को मनाई जाएगी, जबकि कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) का स्नान व दान 30 नवंबर को है. इस दिन बनारस के 84 घाट इन दीयों से सजाए जाएंगे. देव दीपवाली की पूजा बड़े ही भव्य तरीके से की जाती है.
देव दीपावली पर बात महिलाओं की करें तो वो बड़ी आस्था और विश्वास के साथ इस पर्व को मनाती हैं. आमतौर पर महिलाएं किसी भी उत्सव खास बनाने और पर्व की शुभता बढ़ाने के लिए अपने हाथों में मेहंदी रचाती हैं. इसी कड़ी में देव दीपावली के अति शुभ अवसर पर हम आपके लिए लेटेस्ट और खूबसूरत मेहंदी डिजाइन्स, जिन्हें आप अपने हाथों पर अप्लाई करके, उसकी खूबसूरती को बढ़ा सकती हैं.
1- खूबसूरत बैकहैंड मेहंदी डिजाइन
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2- खूबसूरत दीये वाली मेहंदी
3- दीये वाली मनमोहक मेहंदी
4- लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन
हथेली के लिए खूबसूरत डिजाइन
दीये वाली फ्लोरल मेहंदी
देव दीपावली
मान्यता है कि देव दीपावली के दिन सभी देवता बनारस के घाटों पर आते हैं. कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था. त्रिपुरासुर के वध के बाद सभी देवी-देवताओं ने मिलकर खुशी मनाई थी और दीप जलाकर देव दीपावली का पर्व मनाया.
काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन दीपदान करने का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि भगवान शंकर ने खुद देवताओं के साथ गंगा के घाट पर दिवाली मनाई थी, इसीलिए देव दीपावली का धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ जाता है.