Vat Savitri Vrat 2025 Wishes: वट सावित्री की इन प्यार भरे हिंदी WhatsApp Messages, Shayaris, Facebook Greetings, HD Images के जरिए दें शुभकामनाएं
वट सावित्री को उत्तर प्रदेश, बिहार, समेत मध्य प्रदेश में बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं वट वृक्ष के पास एकजुट होकर पूजा-पाठ करती हैं और देवी सावित्री व उनके पति सत्यवान की कथा का स्मरण करती हैं. इस बेहद खास अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, शायरी, फेसबुक ग्रीटिंग्स, एचडी इमेजेस के जरिए वट सावित्री की प्यार भरी शुभकामनाएं दे सकते हैं.
Vat Savitri Vrat 2025 Wishes in Hindi: पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन की चाह रखने वाली महिलाओं के लिए मई का महीना बेहद खास है, क्योंकि इस महीने सुहागन महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखने वाली हैं. दरअसल, वट सावित्री का व्रत पति की लंबी उम्र, तरक्की, खुशहाली, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन महिलाएं व्रत रखकर, सोलह श्रृंगार करती हैं और फिर वटवृक्ष की पूजा करती हैं. ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है, इसलिए इसकी उपासना करने से सुहागन महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, साथ ही वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री का पर्व मनाया जाता है, जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, इस साल 26 मई 2025 को यह पर्व मनाया जा रहा है.
हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शुमार वट सावित्री को उत्तर प्रदेश, बिहार, समेत मध्य प्रदेश में बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं वट वृक्ष के पास एकजुट होकर पूजा-पाठ करती हैं और देवी सावित्री व उनके पति सत्यवान की कथा का स्मरण करती हैं. इस बेहद खास अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, शायरी, फेसबुक ग्रीटिंग्स, एचडी इमेजेस के जरिए वट सावित्री की प्यार भरी शुभकामनाएं दे सकते हैं.
वट सावित्री की पूजा के लिए इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें. अब घर में साफ-सफाई करते हुए गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद वट वृक्ष की पूजा करने से पहले पीले और लाल रंग के वस्त्र धारण करें, साथ ही सोलह श्रृंगार करना न भूलें. अब वट वृक्ष को प्रणाम करें और वहां पर सावित्री व सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें, फिर एक लोटे में साफ जल भरकर वृक्ष की जड़ में अर्पित करें. अब फूल, अक्षत, भीगा चना और गुड़ चढ़ाएं. इसके बाद वट वृक्ष पर सात बार सूत लपेटते हुए इसकी परिक्रमा करें. पूजन के दौरान हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा का श्रवण करें. अंत में फल और वस्त्रों का दान करते हुए वट वृक्ष को प्रणाम कर अपनी पूजा का समापन करें.