Swami Vivekananda Jayanti 2026: स्वामी विवेकानंद जयंती! युवाओं के लिए प्रेरणा और संकल्प का महापर्व, जानें उनसे जुड़ी रोचक बातें

12 जनवरी 2026 को भारत अपने महान आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की जयंती को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाने जा रहा है. जानिए इस वर्ष की विशेष थीम, विवेकानंद के जीवन से जुड़ी रोचक बातें और युवाओं के लिए उनके संदेश की प्रासंगिकता.

स्वामी विवेकानंद जयंती 2025 (Photo Credits: File Image)

Swami Vivekananda Jayanti 2026: हर साल 12 जनवरी 2026 को पूरा देश स्वामी विवेकानंद जी की जयंती (Swami Vivekananda Jayanti) 'राष्ट्रीय युवा दिवस' (National Youth Day) के रूप में मनाता है. विवेकानंद का मानना था कि युवा किसी भी देश की प्रगति का आधार होते हैं. उनकी इसी दूरदर्शिता को सम्मान देने के लिए भारत सरकार ने 1984 में इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश और उत्सव के रूप में घोषित किया था. यह दिन केवल एक महान संन्यासी को याद करने का नहीं, बल्कि उस सोच को समझने का अवसर है, जिसने भारत को आत्मविश्वास दिया. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) का जीवन आत्मबोध, साधना और सेवा का सुंदर उदाहरण था. इस वर्ष यह दिन न केवल एक महापुरुष को याद करने का है, बल्कि 'विकसित भारत @2047' के संकल्प की दिशा में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करने का भी है. यह भी पढ़ें: January 2026 Vrat And Festivals: मकर संक्रांति, वसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस सहित जनवरी में पड़ेंगे कई बड़े व्रत व त्योहार, देखें पूरी लिस्ट

राष्ट्रीय युवा दिवस 2026: थीम और आयोजन

प्रत्येक वर्ष की भांति, इस वर्ष भी केंद्र सरकार द्वारा एक विशेष थीम जारी की गई है. वर्ष 2026 के लिए मुख्य विषय (Theme) है— ‘उठो, जागो और अपनी शक्ति को पहचानो’ (Arise, Awake and Realise Your Power).

इस अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' का समापन हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के युवा प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर रहे हैं. इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नवाचार (Innovation) और नेतृत्व (Leadership) के लिए प्रोत्साहित करना है.

संक्षिप्त जीवनी: नरेन्द्रनाथ से स्वामी विवेकानंद का सफर

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था. उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था.

जीवन से जुड़ी रोचक और अनसुनी बातें

स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व के कई ऐसे पहलू हैं जो आज के युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायी हैं:

  1. नाम का इतिहास: उनका 'स्वामी विवेकानंद' नाम खेतड़ी के राजा अजीत सिंह के सुझाव पर पड़ा था. शिकागो जाने से पहले उन्होंने इसी नाम को स्वीकार किया था.
  2. फोटोग्राफिक मेमोरी: कहा जाता है कि स्वामी जी की एकाग्रता इतनी प्रखर थी कि वे एक बार किताब पढ़कर उसके पन्ने और पंक्तियां तक हूबहू याद कर लेते थे.
  3. मृत्यु की भविष्यवाणी: उन्होंने स्वयं ही कहा था कि वे 40 वर्ष की आयु भी पूरी नहीं करेंगे. उनकी भविष्यवाणी सच हुई और मात्र 39 वर्ष की आयु में (4 जुलाई 1902) उन्होंने महासमाधि ले ली.
  4. खेलों के प्रति प्रेम: वे केवल एक संत नहीं थे, बल्कि कुश्ती, तैराकी और जिमनास्टिक जैसे खेलों के भी शौकीन थे. उनका मानना था कि धर्म को समझने के लिए शरीर का स्वस्थ होना अनिवार्य है.

युवाओं के लिए विवेकानंद का संदेश

आज के डिजिटल और प्रतिस्पर्धात्मक युग में विवेकानंद का दर्शन और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है. उनका कहना था, एक विचार लें, उस विचार को अपना जीवन बना लें—उसके बारे में सोचें, उसके सपने देखें, उस विचार को जिएं.’  वह युवाओं को आत्मविश्वास (Self-Confidence) और चरित्र निर्माण (Character Building) पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते थे.

देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और रामकृष्ण मठों में आज सामूहिक सूर्य नमस्कार, निबंध प्रतियोगिताएं और व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं, जो स्वामी जी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.

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