Swami Dayananda Saraswati Jayanti 2025 Quotes: महर्षि दयानंद सरस्वती (Maharishi Dayananda Saraswati) का जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात के टंकरा में हुआ था, इसलिए हर साल 12 फरवरी को उनकी जयंती (Swami Dayananda Saraswati Jayanti) मनाई जाती है, जबकि हिंदू पंचाग के अनुसार उनका जन्म फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था, इसलिए तिथि के हिसाब से इस साल 23 फरवरी को उनकी जयंती मनाई जा रही है. महर्षि दयानंद सरस्वती के पिता का नाम कृष्णजी लालजी तिवारी और मां का नाम यशोदाबाई था. एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार में जन्में दयानंद सरस्वती का असली नाम मूलशंकर था. उनका प्रारंभिक जीवन बहुत ही आराम से बीता और आगे चलकर उन्होंने संस्कृत, वेद, शास्त्र और अन्य धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन किया. कहा जाता है कि बचपन की एक घटना के बाद उन्होंने सत्य की खोज में अपना घर छोड़ दिया था. सत्य की खोज में वो करीब 15 साल तक भटकते रहे, जिसके बाद उन्हें पूर्णानंद सरस्वती से दीक्षा मिली और वो मूलशंकर से स्वामी दयानंद सरस्वती बन गए.
स्वामी दयानंद सरस्वती ने सन 1875 में गिरगांव में आर्य समाज की स्थापना की. उन्होंने वेदों की सत्ता को सदैव सर्वोपरि माना, साथ ही कर्म सिद्धांत, पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य और संन्यास को उन्होंने अपने जीवन का प्रमुख आधार बनाया. महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती के इस खास अवसर पर आप उनके इन 10 महान विचारों को अपनों संग शेयर करके उनके जन्मोत्सव को खास बना सकते हैं, साथ ही इन विचारों को अपने जीवन का हिस्सा बना सकते हैं.










बताया जाता है कि सन 1876 में सबसे पहले महर्षि दयानंद सरस्वती ने ही स्वराज्य का नारा दिया था, जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया. उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश के लेखन में भक्ति-ज्ञान के अतिरिक्त समाज के नैतिक उत्थान और समाज-सुधार पर भी प्रकाश डाला. महर्षि दयानंद सरस्वती ने पशु बलि, जाति व्यवस्था, अंधविश्वास, बाल विवाह, सती प्रथा और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों का खुलकर विरोध किया.













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