Swami Dayananda Saraswati Jayanti 2025: बाल विवाह, जाति व्यवस्था, पशु बलि और महिलाओं के प्रति भेदभाव सहित सामाजिक समस्याओं के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले शुरुआती लोगों में से एक स्वामी दयानंद सरस्वती थे. विवेकशील दयानंद ने तीर्थयात्राओं और मूर्ति पूजा को भी अस्वीकार किया. उनके जीवन का काम वैदिक मान्यताओं को पुनर्जीवित करना था क्योंकि वे इस बात पर अड़े हुए थे कि हिंदू धर्म अपने मूल मूल्यों से भटक गया है. आर्य समाज स्वामी दयानंद द्वारा स्थापित एक एकेश्वरवादी भारतीय हिंदू सुधार संगठन है जो नैतिक सिद्धांतों और प्रथाओं को बढ़ावा देने में वेदों के सर्वोच्च अधिकार को कायम रखता है. जबकि सरस्वती जयंती और महर्षि दयानंद जयंती विश्व स्तर पर मनाई जाती है, ऋषिकेश का पवित्र शहर इस दिन को मनाने और दयानंद सरस्वती को अंतिम सम्मान देने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है. यह भी पढ़ें: Mahashivratri 2025: कब मनाया जाएगा महाशिवरात्रि 26 या 27 फरवरी को? जानें सटीक मुहूर्त-तिथि, महाशिवरात्रि की तीन कथाएं एवं रात्रि पूजा का महत्व!
बाल विवाह, जाति व्यवस्था, पशु बलि और महिलाओं के प्रति भेदभाव सहित सामाजिक समस्याओं के खिलाफ बोलने वाले शुरुआती पुरुषों में से एक स्वामी दयानंद थे. उनके अनुयायी इस दिन उनकी शिक्षाओं, नैतिकता और अच्छे कार्यों को याद करते हैं. हर साल, लोग महान हिंदू भिक्षु के सम्मान में महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती मनाते हैं, जिनकी सामाजिक सेवाओं को आज भी महत्व दिया जाता है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात के काठियावाड़ जिले के टंकारा गांव में हुआ था. स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती के इस अवसर पर आप इन हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, जीआईएफ ग्रीटिंग्स, फोटो एसएमएस के जरिए शुभकामनाएं दे सकते हैं.
* इंसान को दिया गया सबसे बड़ा संगीत यंत्र उसकी खुद की आवाज है.

* आत्मा अपने स्वरूप में एक ही है, लेकिन उसके अस्तित्व अनेक हैं.

* सबसे उच्च कोटि की सेवा ऐसे व्यक्ति की मदद करना है, जो बदले में आपको धन्यवाद कहने में असमर्थ हो.

* भगवान का ना कोई रूप है, ना रंग है. वह अविनाशी और अपार है, इसलिए जो भी इस दुनिया में दिखता है, वही उसकी महानता का वर्णन करता है.

* किसी भी रूप में प्रार्थना प्रभावी है, क्योंकि यह एक क्रिया है, इसलिए इसका परिणाम होगा. यही इस ब्रह्मांड का नियम है, जिसमें हम खुद को पाते हैं.

* नुकसान से निपटने में सबसे जरूरी चीज है उससे मिलने वाले सबक को ना भूलना. सही मायने में वही आपको विजेता बनाता है.

* आप दूसरों को बदलना चाहते हैं, ताकि आप आजाद रह सकें, लेकिन, आपकी ये कोशिश कारगर नहीं हो सकती. दूसरों को स्वीकार करिए, आप खुद को मुक्त पायेंगे.

* अगर आप पर हमेशा उंगली उठाई जाती रहे तो आप भावनात्मक रूप से अधिक समय तक खड़े नहीं हो सकते.

* गीत व्यक्ति के मर्म का आह्वान करने में मदद करते हैं और बिना गीत के मर्म को छूना मुश्किल है,

* धन एक वस्तु है, जो ईमानदारी और न्याय से कमाई जाती है, इसका ठीक विपरीत है अधर्म का खजाना.

* कोई मूल्य तभी मूल्यवान है, जब मूल्य का मूल्य स्वयं के लिए भी मूल्यवान हो.

* जिह्वा को वही व्यक्त करना चाहिए जो हृदय में है.

स्वामी दयानंद सरस्वती को बचपन में मूलशंकर के नाम से जाना जाता था, उन्होंने बचपन की एक घटना के बाद शिव की खोज में अपना घर छोड़ दिया था. सत्य की तलाश में करीब 15 साल तक भटकने के बाद उन्होंने स्वामी पूर्णानंद सरस्वती से दीक्षा ली और बाद में स्वामी दयानंद सरस्वती कहलाए. स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में समाज में व्याप्त कुरीतियों और रूढ़िवादी परंपराओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी. उन्होंने रूढ़िवादिता, जातिगत कठोरता, अस्पृश्यता, मूर्तिपूजा, पुरोहितवाद जैसी चीजों की कड़ी आलोचना की थी.













QuickLY