Shab e Barat 2026 Sehri and Iftar Time: दिल्ली, मुंबई, लखनऊ समेत प्रमुख शहरों के लिए इफ्तार और सहरी का समय
शब-ए-बारात 2026

नई दिल्ली: इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं और 15वीं तारीख की मध्यरात्रि को मनाई जाने वाली शब-ए-बारात इस साल फरवरी के पहले सप्ताह में पड़ रही है. भारत में चांद के दीदार के अनुसार, शब-ए-बारात की मुकद्दस रात 3 फरवरी 2026 को होने की उम्मीद है. इस अवसर पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग नफिल रोजा रखते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हमने दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए 2, 3 और 4 फरवरी के रोजा इफ्तार और सहरी के समय की सूची तैयार की है.

रोजा रखने की सही तारीख (Shab E Barat 2026 Roza Date)

शब-ए-बारात पर रोजा रखना सुन्नत और नफिल इबादत माना जाता है. चूंकि इस्लामी दिन सूर्यास्त (मग़रिब) से शुरू होता है, इसलिए तारीखों को लेकर अक्सर उलझन रहती है.

मुकद्दस रात: 3 फरवरी की शाम से 4 फरवरी की सुबह (फज्र) तक.

रोजा (Fasting): अधिकांश श्रद्धालु 4 फरवरी 2026 (बुधवार) को 15वीं शाबान का रोजा रखेंगे.

नफिल रोजे: कई लोग 13, 14 और 15 शाबान (2, 3 और 4 फरवरी) को लगातार तीन दिन के रोजे रखना भी पसंद करते हैं.

शब-ए-बारात शहरवार इफ्तार और सहरी का समय (फरवरी 2026)

नीचे दिए गए समय स्थानीय सूर्यास्त और सूर्योदय के आंकड़ों पर आधारित हैं. स्थान के अनुसार इसमें 1-2 मिनट का अंतर संभव है.

दिल्ली सहरी इफ्तार टाइम

2 फरवरी 05:48 सहरी     इफ्तार 18:01

3 फरवरी 05:47 सहरी      इफ्तार  18:02

4 फरवरी 05:47 सहरी       इफ्तार 18:03

मुंबई सहरी इफ्तार टाइम

2 फरवरी 05:57 सहरी         इफ्तार 18:32

3 फरवरी 05:57 सहरी         इफ्तार 18:33

4 फरवरी 05:56 सहरी         इफ्तार 18:34

लखनऊ सहरी इफ्तार टाइम

2 फरवरी 05:32 सहरी          इफ्तार 17:50

3 फरवरी 05:31 सहरी           इफ्तार 17:51

4 फरवरी 05:30 सहरी          इफ्तार 17:52

पटना सहरी इफ्तार टाइम

2 फरवरी 05:21 सहरी             इफ्तार 17:36

3 फरवरी 05:20 सहरी             इफ्तार 17:37

4 फरवरी 05:19 सहरी               इफ्तार 17:38

हैदराबाद सहरी इफ्तार टाइम

2 फरवरी 05:38 सहरी                 इफ्तार 18:16

3 फरवरी 05:38 सहरी                  इफ्तार 18:17

4 फरवरी 05:37 सहरी                   इफ्तार 18:17

शब-ए-बारात का धार्मिक महत्व

शब-ए-बारात को 'गुनाहों से माफी की रात' (Night of Forgiveness) कहा जाता है. इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, इस रात अल्लाह अपने बंदों के लिए रहमत के दरवाजे खोल देता है और सच्चे मन से मांगी गई तौबा कुबूल की जाती है. यह भी माना जाता है कि इसी रात आने वाले साल के लिए इंसानों का भाग्य (Destiny) और जीविका तय की जाती है.

इबादत और परंपराएं

इस रात मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों और घरों में रात भर जागकर विशेष नमाज (नफिल), कुरान की तिलावत और दुआएं करते हैं. इसके अलावा, अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कब्रिस्तान जाकर 'दुआ-ए-मगफिरत' करने की भी परंपरा है. कई लोग इस दिन गरीबों को भोजन कराते हैं और हलवा व अन्य मिठाइयां बांटते हैं.