Ramzan Mubarak 2025 Wishes: रमजान के इन शानदार हिंदी WhatsApp Messages, Facebook Greetings, Quotes के जरिए अपनों को दें मुबारकबाद
रमजान के पाक महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखकर अपना ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में बिताते हैं, फिर 29 या 30 दिन के रोजे के बाद चांद का दीदार होने पर ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है. रमजान का चांद नजर आते ही लोग माह-ए-रमजान की बधाई देते हैं. ऐसे में आप इन शानदार विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स के जरिए अपनों को रमजान मुबारक कह सकते हैं.
Ramzan Mubarak 2025 Wishes in Hindi: इस्लामी कैलेंडर के 9वें महीने रमजान (Ramzan) को इस्लाम धर्म में बेहद पाक और खास माना जाता है, जिसका इंतजार दुनिया भर के मुलसमानों को बेसब्री से रहता है. इसे रहमतों और बरकतों का महीना माना जाता है, साथ ही इस महीने ईद-उल-फितर (Eid-ul-Fitr) का त्योहार भी मनाया जाता है. इस महीने में 29 या 30 दिनों तक दुनिया भर के मुसलमान रोजा रखते हैं, लेकिन रमजान सिर्फ भूख-प्यास को कंट्रोल करने का महीना नहीं है, बल्कि यह रूह यानी आत्मा को पाक करने व अल्लाह के करीब जाने का विशेष महीना भी है. इस पूरे महीने मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की मगफिरत की दुआ करते हैं. रमजान के पहले रोजे की तारीख चांद के दीदार पर निर्भर करती है. अगर भारत में रमजान का चांद 28 फरवरी 2025 को दिखता है तो पहला रोजा 1 मार्च को होगा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो रोजे की शुरुआत 2 मार्च से होगी.
रमजान के पाक महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखकर अपना ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में बिताते हैं, फिर 29 या 30 दिन के रोजे के बाद चांद का दीदार होने पर ईद-उल-फितर यानी रमजान ईद का त्योहार मनाया जाता है. रमजान का चांद नजर आते ही लोग माह-ए-रमजान की बधाई देते हैं. ऐसे में आप इन शानदार विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स के जरिए अपनों को रमजान मुबारक कह सकते हैं.
रमजान महीने की शुरुआत होते ही सूर्योदय से पहले सहरी खाकर लोग अपने रोजे की शुरुआत करते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद इफ्तार करके अपना रोजा खोलते हैं. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान के महीने में पैगंबर मोहम्मद के सामने इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ का अनावरण हुआ था, इसलिए इस महीने को सबसे पवित्र माना जाता है. वैसे तो इस महीने में रोजा रखना मुसलमानों के लिए अनिवार्य माना जाता है, लेकिन नवजात बच्चों, बीमारी से पीड़ित लोगों, गर्भवती महिलाओं और माहवारी के दौरान महिलाओं को रोजा न रखने की छूट होती है.